sach ka aaina

अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

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sunita dohare Management Editor


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.कोयले की कालिख

Posted On: 27 Sep, 2012  
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कब तक रोयेगा बुंदेलखंड – सुनीता दोहरे

Posted On: 18 Sep, 2012  
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प्यार की तपिश का एहसास

Posted On: 25 Aug, 2012  
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मैंने तुम्हें माँफ किया

Posted On: 16 Aug, 2012  
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जिन्दगी का कडुवा सत्य ! आखिर क्यों ???????

Posted On: 10 Aug, 2012  
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मेरी मोहब्बत की जंग

Posted On: 7 Aug, 2012  
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सुनीता दोहरे का खुला खत श्री राम की सिया के नाम

Posted On: 27 Jul, 2012  
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मन की अनुभूतियां

Posted On: 24 Jul, 2012  
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गरीबी

Posted On: 24 Jul, 2012  
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अहसास

Posted On: 24 Jul, 2012  
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काश हम कवि होते !

Posted On: 24 Jul, 2012  
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जीवन-दर्शन में आत्म-तत्व का महत्व

Posted On: 24 Jul, 2012  
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हृदय में तुम

Posted On: 24 Jul, 2012  
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मानव मन

Posted On: 24 Jul, 2012  
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सदमे में मोहब्बत

Posted On: 24 Jul, 2012  
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खुली आँख के सपने

Posted On: 24 Jul, 2012  
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भुक्कड़ “ पति ” जी

Posted On: 24 Jul, 2012  
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अपनों से ही जूझ रहा,अपना-अपना रक्त !!

Posted On: 23 Jul, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Govind Bharatvanshi Govind Bharatvanshi

एकदम सटीक चित्रण किया है आपने जैसे कि "एक ओर संसार को धर्म नामक कीड़ा खाए जा रहा है, दूसरी ओर से राजनीति की बर्बरता अवाम को नष्ट कर रही है एक अजीब सी निष्ठुर असंवेदनशीलता सामाजिक रिश्तों में उतरती जा रही है। लोग क्यों नहीं देख रहे कि वे खुद का ही नाश किये जा रहे हैं? आज के जमाने में सभ्यता एक भ्रम बनकर रह गयी है, हम कल भी एक जानवर थे आज भी एक जानवर ही हैं हमारा सारा ज्ञान सारी तकनीक खुद को दूसरों से श्रेष्ठ साबित करने का औजार मात्र भर हैं हम आज भी जानवरों की तरह अपने अस्तित्व की लड़ाई ही लड रहे हैं बस आधुनिक तकनीक ने शास्त्रों की मारकता बढ़ा दी है घर्म के नाम पर जो भी अनैतिक काम करने वाले की धूम मची हुई है वहीँ दूसरी तरफ जनता के हित के नाम जनता को ही लूटा जा रहा है  ! " सच कहा आपने सुनीता दोहरे जी l

के द्वारा: juranlistkumar juranlistkumar

भारतीय समाज में नारी स्थान अनुपम है स्त्री के साथ भेद दृष्टि और लैंगिक असमानता के सैकड़ों संदर्भ समस्त धर्म, साहित्य और परम्परा में बिखरे पड़े हैं। कोई भी धार्मिक मान्यता इससे अछूती नहीं है। सम्प्रदाय मानसिकता में जीने वाली परम्पराएं मानव के रूप में स्त्री को प्रतिष्ठित नहीं कर पायी हैं। जो सभ्य समाज नारी को देवी के रूप में पूजता है आज उसी सभ्य समाज से नारी को अपने आस्तित्व के लिए लडऩा पड़ रहा है, कहने को ये सभ्य समाज होने वाले आडंबरों में सर्वप्रथम ‘कन्या देवी’ का पूजन करते हैं लेकिन इसी पूजन करने वाले आडंबरी समाज में अपनी इन कन्या देवियों को जन्म से पहले ही उखाड़ फैंकने की पुरजोर कोशिश करते हैं। बेटी के नाम पर सौ-सौ कसमें खाने वाला समाज बेटी को उसकी मां की कोख में ही दफनाने में गुर्रेज नहीं करता बिल्कुल सत्य और सही लिखा है आपने आदरणीय सुनीता दोहरे जी , और जागरण ने भी आपकी पोस्ट का उचित पारितोष दिया है ! हार्दिक बधाई

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

सुनीता जी भावनायें उत्तम है किन्तु सत्य यही है क़ि जो तुलसीदास ने समझा यानि ढोल गंवार शूद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी | किन्तु इसके लिए नर को भी नारायण अवतार होना चाहिए | या देवी सर्वभूतेषु ..........नमस्तश्यै नमस्तश्यै ,नमस्तश्यै नमो नमः से पूजते अहंकार ग्रस्त नारी चण्डी अवतार ही दिखती है | रूप लावण्य के फ़िल्मी अंदाज के रोमांटिक गीत गाते दीवाने नर गुलाम बनकर प्रताडना सहते हैं। क्या नर क्या नारी दोनों मानवीय ,भावनाओं मै ही जी सकते हैं , ना नर नारायण बन सकता है ,ना नारी देवी । पढ लिख कर ,कपडे पहिन घर बार बनाते मनुष्य अवस्य कहलाते हैं किंतु सामान्य जीव जंतुओं से अलग नहीं हैं । ओम शांति शांति का अहसास तीनों लोकों मैं विचरते नारद मुनी भी नहीं कर पाये । कभी नर रूद्र कभी नारी चंडी । .......बस ओम शांति शांति शांति जपो और मुॅह ढककर सो जाओ .........ओम शांति शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

सुनीता जी निबंध लिखा जाये तो उत्तम है किन्तु सत्य यही है क़ि जो तुलसीदास ने समझा यानि ढोल गंवार शूद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी | किन्तु इसके लिए नर को भी नारायण अवतार होना चाहिए | या देवी सर्वभूतेषु ..........नमस्तश्यै नमस्तश्यै ,नमस्तश्यै नमो नमः से पूजते अहंकार ग्रस्त नारी चण्डी अवतार ही दिखती है | रूप लावण्य के फ़िल्मी अंदाज के रोमांटिक गीत गाते दीवाने नर गुलाम बनकर प्रताडना सहते हैं। क्या नर क्या नारी दोनों मानवीय ,भावनाओं मै ही जी सकते हैं , ना नर नारायण बन सकता है ,ना नारी देवी । पढ लिख कर ,कपडे पहिन घर बार बनाते मनुष्य अवस्य कहलाते हैं किंतु सामान्य जीव जंतुओं से अलग नहीं हैं । ओम शांति शांति का अहसास तीनों लोकों मैं विचरते नारद मुनी भी नहीं कर पाये । कभी नर रूद्र कभी नारी चंडी । .......बस ओम शांति शांति शांति जपो और मुॅह ढककर सो जाओ .........ओम शांति शांति शांति 

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

sonam saini जी सादर नमस्कार , सर्वप्रथम तो आपका मेरी पोष्ट पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! शायद आपने मेरी रिपोर्ट को ठीक से नहीं पढ़ा मैंने स्वयं इस रिपोर्ट में लिखा है की """""""""मुझे लगता है कि पुरूष निर्मित आधार तल पर खड़े होकर, स्वयं को उत्पाद मानकर, देह को आधार बना कर स्त्री विमर्श, नारी मुक्ति की चर्चा करना भी बेमानी सा लगता है इसलिए यहाँ मैं इस वर्ग को हटाकर अपनी बात कह रही हूँ सही मायने में देखा जाये तो पुरूष वर्ग के विरोध में खड़ी नारी शक्ति स्वयं को नारी हांथों में खेलता देख रही है l आज नारी योग्यताओं के शिखर पर जा कर भी, दहेज़ की बलि चढ़ी तो कभी, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, बलात्कार से छली गई तो कभी, परित्यक्ता बनी, तो कभी किसी के घर को उजाड़ने का कारण बनी, बजह अगर देखी जाये तो यही निकल कर सामने आती है कि स्त्री ने कभी पुरुष और पुरुष ने स्त्री पर जहाँ विश्वास नहीं किया वहाँ नारी ना श्रद्धा बनी ना पुरुष को ही मान सम्मान मिला।"""""""

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

ये सब जानते हैं कि अत्याचार का कोई मजहब नहीं होता तो आपको ये भी मानना पड़ेगा कि राजनीती मजहब पर नही की जा सकती l मजहब पर होने वाली राजनीति का अस्तित्व ना के बराबर होता है l यहाँ पर मोदी सरकार पर इल्जाम लगाने का मेरा मतलब सिर्फ इतना है कि अगर मोदी सरकार चाहती तो कठोर कदम उठाते हुए दोषियों पर कार्यवाही करवाती क्यूंकि दलितों के मामलों को लेकर इनकी सरकार हमेशा उदासीन रही है, प्रदेश सरकारों के मुख्यमंत्रियों की इतनी औकात कहाँ कि जिगर खोलकर ये कह सकें कि मेरे राज्य में दलितों और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों पर हम सख्त कानूनी कार्रवाई कर कड़ी सजा देते  हैं l Lllllll बहुत खूब लिखतीं हैं आप एक एक बात खरी lllllll

के द्वारा: juranlistkumar juranlistkumar

के द्वारा: Dr. D K Pandey Dr. D K Pandey

सुनीताजी नमस्कार ! वैसे भी आप तो मीडिया से जुड़े है, देश विदेश की सामाजिक व्यवस्थावों से आपका साक्षात्कार हो चुका है ! नारी समाज के अधिकारों के लिए आपके हाथों लहराता हुआ झंडा आपके अंदर नारी समाज के उत्पीड़न का दर्द दर्शाता है ! सुनीता जी आप ज़रा इतिहास के पन्नो को झाँक के देखिए, सति प्रथा को समाप्त करने के लिए राजा राम मोहन राय स्वयं इंग्लैण्ड गए थे और वहां की पार्लियामेंट से इस कुरीति को समातप करवाया था, वे मर्द थे ! आज चेन्नईं, राजस्थान, पश्चिमी बंगाल, की मुख्या मंत्री की कुर्सियां महिलाएं ही सुशोभित कर रही हैं, कोयल मर्दों के सहयोग से ! प्रभा पाटिल पांच साल तक देश की सबसे बड़ी कुर्सी राष्ट्रपति बन कर रही, इंद्रा गांगी तकरीवन १८ साल प्रधान मंत्री रही, मायावती, राबड़ी देवी को तो आप भूली नहीं होंगी ? इनको सत्ता पर बिठाने में मर्दों की सहमति थी ! देखिए परिवार में नयी नवेली बहु आती है, उसे दहेज़ के लिए परेशान करने वालों में मुख्य भूमिका निभाने वाली, सासू माँ, बड़ी बहु और नन्द होती हैं जो स्वयं नारी होती हैं ! ससुर और पति न चाहते हुए भी बहुमत का साथ देने के लिए मजबूर होजाते हैं ! आपने बहुत सुन्दर ढंग से अपने मनके विचार जागरण जंक्शन के पाठकों तक पहुंचाए , बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

शबनम कभी शोला कभी तूफ़ान हैं ऑंखें .......'ऑंखें' का यह गीत बड़ा मार्मिक सत्य को कहता है | आज लगता है आप को पहिली बार शबनमी ऑंखें नजर आई हैं | डूबती इतराती लहराती ऑंखें तब शोला बन जाती हैं जब दिल से दिल न मिले | ... किन्तु जो डूब चूका है इन आँखों मैं उसे तूफानी उफनती भी होती नजर जाती हैं | काश न डूबा होता इन आँखों मैं ...| कुछ समझदार इन आँखों मैं न डूबते महान हस्तियां बन चुके हैं | भारत के राष्ट्र पति ,प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री तक बन चुके हैं | हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री जी ने तो भूल सुधार करते आँखों से नजरें ही चुरा ली हैं | रूस के राष्ट्र पति जी कभी आँख का मतलब भी नहीं समझते थे ,अचानक इस उम्र के पड़ाव मैं उन्हें आँखों का आभास हुआ | नारद मुनी जी तो ब्रह्मर्षि होते हुए भी अचानक आँखों के चक्कर मैं पड़कर अपना सम्मान खो बैठे थे | ............कमजोर मानसिकता के लोग साध्वी या सन्यासी तक हो जाते हैं | भाग्यशाली ही होते हैं कुछ लोग जो नित नैन मटक्का करते नए नए गीतों को भंवरों की तरह गुनगुनाते राजस सुख वैभव पाते हैं | ............................सुनीता जी आपके लेख ने सन्यासी को भी डुबो देने की क्षमता है इसीलिये डूबने से पाहिले साधारण जन को आगाह कर रहा हूँ | शायद अपना लोक परलोक बचा सकें | ओम शांति शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीया सुनीता दोहरे जी ! बेहद शर्मनाक घटना ! सबसे पहले आपके.पीसीएस अधिकारी के और एसपी सिटी बरेली राजीव मल्होत्रा जी के बदमाशों से जूझने के हौसले को सलाम ! महिलाओं से अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ करनेवाले ऐसे संस्कारहीन लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए ! मोदी साहब का झाड़ू ऐसे अपराधियों पर न जाने कब चलेगा ! ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था भी बहुत ख़राब है ! मैंने कई साल से ट्रेनों से यात्रा करना ही छोड़ दिया है,क्योंकि कई साल पहले मैं लखनऊ से कानपूर जा रहा था.मेरे पास बैठ एक बद्तमीज सिगरेट पर सिगरेट फूंके जा रहा था.मेरे शिष्यों ने उसे कई बार समझाया,पर वो माना नहीं,बल्कि उलटे झगड़ा करने लगा.टीटी और पुलिसवाले भी उसे सिगरेट फूंकने से नहीं रोक पाये ! मैंने बद्तमीज लोंगो और अपराधियों की शरणस्थली बन चुकी भारतीय ट्रेनों से यात्रा करना ही छोड़ दिया ! आपने सही कहा है कि लानत है उस डिब्बे में बैठे उन तमाम यात्रियों पर और उन सहयात्रियों पर जो अपने साथ सफ़र कर रहे यात्रियों की मदद नहीं कर सकते और सिर्फ सरकार व पुलिस को कोसते रहते हैं ! एक शर्मनाक,परन्तु तुरंत कड़ी कार्यवाही किये जाने हेतु अत्यंत विचारणीय घटना शेयर करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आपको दिवाली की शुभकामनाएं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

के द्वारा: juranlistkumar juranlistkumar

sadguruji , नमस्कार ! सत्य कहा आपने लखनऊ में हुए गैंगरेप के बाद एसपी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहते है कि आबादी के हिसाब से यूपी में सबसे कम रेप होते हैं। समाजवादी पार्टी के चीफ मुलायम सिंह ने अपनी ऐसी घटिया मानसिकता वाली प्रतिक्रिया लखनऊ के मोहनलालगंज में दिल्ली की निर्भया जैसी हुई बर्बर गैंग रेप की वारदात के बाद दी है। मुलायम ने कहा, 'प्रदेश की आबादी बहुत ज्यादा है। यहां 21 करोड़ से ज्यादा की आबादी है। यदि देश भर में सबसे कम रेप कहीं होते हैं तो वह उत्तर प्रदेश है। राज्य में हर अपराध को कंट्रोल नहीं किया जा सकता।' अब इनकी दिमाग की फितरत को क्या कहा जाए ये नौटंकीबाज अब आंकडो की मुठभेड़ कर रहे हैं....अब यही बचा है कि विपक्ष मे जनता की आवाज़ और सत्ता मे आंकडो का खेल.... बड़ी बेशर्म हैं हमारे देश के नेताओं की मानसिकता. इन आंकड़ों के हिसाब से सरकार तो सरकार, यूपी का महिला आयोग भी निकम्मा साबित हो रहा है।

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

आपने सही कहा है-धिक्कार है उस समाज पर जो अपने समाज की महिलाओं और उनके सम्मान संस्कार की रक्षा नहीं कर सकते, धिक्कार है उन दुष्कर्मियों पर जो कानून अपने हाथ में लेकर महिलाओं का शोषण बालात्कार या हत्या कर अपने को बलवान साबित करते हैं !!!!!! अपराधियों को जबतक सार्वजनिक रूप से मृत्युदंड की सजा नहीं मिलेगी,तबतक लोंगो के मन में कानून के प्रति भय पैदा नहीं होगा और अपराध भी कम नहीं होंगे ! अपराध दिंिोड़िन बढ़ते ही जा रहे हैं ! कागजी खानापूर्ति और झूठे आश्वासन देने के सिवा प्रशासन और कुछ नहीं कर पा रहा है ! इस अमानवीय और क्रूर कृत्य की जितनी भी निंदा की जाये कम है ! समाज में संस्कारी लोग कम हो रहे हैं और नशेड़ी,मनबढ़ू व कुसंस्कारी लोग बढ़ते जा रहे हैं ! यही लोग अपराध भी कर रहे हैं ! इन लोंगो की गतिविधियों पर जबतक सरकार अंकुश नहीं लगाएगी,तबतक बढ़ते अपराधों पर नियंत्रण नहीं होगा !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदयणीया सुनीता दोहरे जी !आपका लेख एक सुन्दर विस्तृत लेख है जिसमे आपने मोदीजी की सफलता के मूल को लोगों तक पहुँचाने का पूरा सफल प्रयत्न किया है और साथ में अपनी इन यतार्थपूर्ण लाइनों में वो प्रश्न भी कर दिया जो की मोदी की अब आने वाले दिनों की सफलता का लिटमस टेस्ट होगा– “मुझे लगता है कि पांच साल नहीं अब तो 10 साल तक यह मोदी नामा चलता रहेगा। लेकिन मैं एक आम आदमी और एक आदमी के नजरिए से ही सोचती हूं। भई मेरे लिए अच्छे दिन तब आयेंगे जब मेरे घर का बजट, सिलेंडर, पैट्रोल, डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, खाद्य पदार्थों, बस व रेल किराया नहीं बढ़ेगा। सड़कों पर सफाई, अतिक्रमण बंद होगा। सर्विस टैक्स हटेगा, जो चैन से होटल में खाना भी नहीं खाने देता। बिजली, पानी भरपूर मात्रा में मिलेगा। सड़कों पर गड्ढे नहीं होंगे सबसे बड़ी और खास बात जिस दिन मैं सड़क पर बेखौफ होकर सुरक्षित चलने का अहसास करूंगी, शायद तभी मैं कहूंगी कि अब अच्छे दिन आ गए हैं” सुन्दर तर्कपूर्ण लेख के लिए साधुवाद.

के द्वारा: juranlistkumar juranlistkumar

आपका लेख एक सुन्दर विस्तृत लेख है जिसमे आपने मोदीजी की सफलता के मूल को लोगों तक पहुँचाने का पूरा सफल प्रयत्न किया है और साथ में अपनी इन यतार्थपूर्ण लाइनों में वो प्रश्न भी कर दिया जो की मोदी की अब आने वाले दिनों की सफलता का लिटमस टेस्ट होगा-- "मुझे लगता है कि पांच साल नहीं अब तो 10 साल तक यह मोदी नामा चलता रहेगा। लेकिन मैं एक आम आदमी और एक आदमी के नजरिए से ही सोचती हूं। भई मेरे लिए अच्छे दिन तब आयेंगे जब मेरे घर का बजट, सिलेंडर, पैट्रोल, डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, खाद्य पदार्थों, बस व रेल किराया नहीं बढ़ेगा। सड़कों पर सफाई, अतिक्रमण बंद होगा। सर्विस टैक्स हटेगा, जो चैन से होटल में खाना भी नहीं खाने देता। बिजली, पानी भरपूर मात्रा में मिलेगा। सड़कों पर गड्ढे नहीं होंगे सबसे बड़ी और खास बात जिस दिन मैं सड़क पर बेखौफ होकर सुरक्षित चलने का अहसास करूंगी, शायद तभी मैं कहूंगी कि अब अच्छे दिन आ गए हैं" सुन्दर तर्कपूर्ण लेख के लिए साधुवाद. सुभकामनाओं के साथ ..रवीन्द्र के कपूर

के द्वारा: Ravindra K Kapoor Ravindra K Kapoor

के द्वारा: munish munish

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

पहली बात तो यह है कि एक औरत बहुत जल्द ही बिना विचार किए किसी दूसरी औरत के चरित्र का विश्लेषण करने लगती है। मीडिया और राजनीति का किस हद तक जुड़ाव है इस बात को आपको समझाने की जरूरत नहीं होंगी। आंनद प्रधान जी को आप इतने करीब से जानती है सुनीता जी, तो आप यह भी जानती होगी कि अमृता और आनंद प्रधान जी ने प्रेम विवाह किया था। फिर ऐसा क्या हुआ कि अपनी उम्र के 35 साल किसी पुरुष के साथ व्यतीत करने के बाद किसी अन्य पुरुष का सहारा लेने की जरूरत पड़ी। खैर आपने इन सब तमाम विषयों पर विचार नहीं किया होगा। यदि आप वास्तव में निजता का सम्मान करती तो आप इस प्रकार के विषय पर अपनी कलम चलाने की जरूरत नहीं समझती। मीडिया ने टीआरपी के लिए इस मामले को एक खेल का रूप दिया और आप जैसे खिलाड़ियों ने इस खेल में भाग लिया। सोचिए यदि आप जैसे लोग इस विषय को यह सोचकर नकार दें कि यह किसी के निजी जीवन से संबंधित है तो मीडिया कभी भी ऐसे मामले से टीआरपी नहीं ले पाएगी। लेकिन सुनिता जी आपको भी इस गर्मागर्म विषय पर लिखकर एक आदि कमेंट मिल ही गई बस वो ही काम मीडिया करती है। आपके लिए एक सलाह है कि इस प्रकार के विषयों पर लिखने से पहले पूर्ण जानकारी लीजिए नहीं तो फिर किसी अन्य विषय का चुनाव कर लीजिए क्योंकि मुझें यकीन है कि आपकी कलम को केवल चलने मतलब है..अब क्या लिख रही है इस विषय पर भला कौन ध्यान दें। मुझें संतोष मिल जाता यदि आप जैसी एक भी स्त्री इस विषय पर लिखने से पहले समाज, समाज द्वारा निर्मित की गई स्त्री की सीमा रेखाएं, पुरुष का नजरिया, एक-दूसरे के प्रति आकर्षण का कारण या फिर मीडिया और राजनीति का संबंध जैसे तमाम विषयों पर विचार करती और फिर इस विषय पर टिप्पणी करती। खैर आपने भी बिना विचार किए, अपनी चुनौती में किसी अन्य औरत को सामने पाकर उसके चरित्र का विश्लेषण कर दिया।

के द्वारा: गुजारिश (कीर्ति चौहान) गुजारिश (कीर्ति चौहान)

sadguruji , सर , सबसे पहले तो आपको बहुत -बहुत धन्यवाद क्योंकि आपने मेरी रचनाओं को पढ़ा और सराहा ..... सद्गुरु जी , मुझे चयन मंडली से कोई शिकायत इसलिए नहीं है कि मैं ये सोचकर कभी नहीं लिखती हूँ कि मैं चयनित की जाऊं .... यहाँ पर एक से एक लेखक है जो मुझसे ज्यादा कहीं माहिर हैं और उनसे मुझे जो सीख मिल रही है वो मेरे लिए बहुत बड़ा गिफ्ट है ..... और मेरे लिए सबसे बड़ी बात ये भी है कि "जागरण जंक्शन ब्लॉग" पर मैं खुल कर लिख सकती हूँ ........ ऐसा भी नही कि मैं कभी चुनी नहीं गयी .... कई बार बेस्ट ब्लॉगर भी बन चुकी हूँ ..... मेरी पोस्ट टॉप पर कई बार रही है ...... मुझे ख़ुशी है कि इस मंच के जरिये मैं अपने विचारों से सभी को अवगत करा पा रही हूँ और साथ ही साथ समाज को कुछ दे प् रही हूँ ......... सादर नमन ....

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

वाह रे आम आदमी के “ख़ास” आदमी सरकारी बंगले को लेने से मना कर चुके दिल्ली के मुख्यचमंत्री अरविंद केजरीवाल को रहने के लिए मिला अपार्टमेंट कई सुप्रीम कोर्ट जजों के बंगलों और केंद्रीय मंत्रियों के बंगले से बड़ा है. केजरीवाल के परिवार ने अपार्टमेंट देख लिया है, अपार्टमेंट की चाभी दिल्ली सरकार को साफ सफाई के लिए दे दी गई है। ये फ्लैट आम आदमी के फ्लैट के जैसा न होकर सारी सुविधाओं से लैस है. केजरीवाल को एक दूसरे से सटे दो फ्लैट आबंटित हुए हैं। एक में उनका दफ्तर होगा और दूसरे में वो खुद रहेंगे. भगवानदास रोड पर बने ये दोनों फ्लैट ड्यूपले हैं शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 7/7 भगवानदास रोड में होगा केजरीवाल का दफ्तर, तो 7/6 भगवानदास रोड केजरीवाल का निवास होगा. दोनों अपार्टमेंट में 5-5 बेडरुम और एक-एक लॉन हैं। दोनों अपार्टमेंट का कुल एरिया है करीब 9 हजार वर्ग फीट और बिल्ट अप एरिया है करीब 6 हजार वर्ग फीट है.............. वैसे सुबह की बात शाम को और शाम की बात सुबह भूल जाना ही तो एक अच्छे नेता का लक्षण है......... सुनीता दोहरे .....

के द्वारा: sunita dohare sub editor sunita dohare sub editor

सुनीता जी, आपने तमाम देश के सच्चे देश प्रेमियों, भक्तों की छिपी आवाज को उजागर किया है ! हम कहते हैं कि भारत की जनता इन ६६ सालों में काफी शिक्षित हो गयी है ! अपने मतों की कीमत और इसका प्रयोग कैसे करना है, इसे अच्छी तरह जान गयी है, लेकिन हम गलत हैं ! कांग्रेस ६६ सालों से राज कर रही है, काले धन से विदेशी बैंकों को भर रही है, खुद लखपति से अरब पति बन रहे हैं, जनता के विकास के नाम पर नेताओं के महल बन रहे हैं ! अरविंद केजरीवाल आम आदमी की पार्टी के नाम पर काश्मीर से भी छूट कारा पाना चाहते हैं ! आतंकावाद फैलानेवालों को भी आम आदमी बता रहे हैं ! कल तक कांग्रेस को भ्रष्टचारी बता रहे थे आज सरकार उन्ही के सहयोग से बना रहे हैं ! आँखें बंद करके ऐसे राजनेताओं को ही मत देकर जीता रहे हैं ! असलियत बयान करने के लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं ! हरेन्द्र जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: abhishek shukla abhishek shukla

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा: anilkumar anilkumar

सुनीता जी सबसे पहले मैं आपकी कलम को सलूट करूंगा इतना सटीक सही तथ्यों को उजागर करते हुए आप ने जनता को जगा दिया है ! ये आपकी कलम से निकली जनता की आवाज है, आपने मशाल जला दी और अब इस मशाल से हजारों और फिर करोड़ों मिशाले जलेंगे, इन अखलेश-मुलायम के खिलाफ, गुंडे राज के खिलाफ ! वे दुर्गा हैं, दुर्गा शक्ती नागपाल, तीन शक्तियों का गठ बंधन, वे दुर्गा के साथ साथ शक्ती और नागों को पालती हैं तो फिर ये बरसाती मेढक, जनता की डाली घास चरने वाले क्या दुर्गा से टकरा पाएंगे ? नहीं ! मैं स्वयं दुर्गा जी को हमेशा याद करता हूँ तो रोज एक नई शक्ती मिलती है ! फिर ये अखिलेश यादव, मुलायमसिंह यादव इनके दिन नजदीक आगये, कहते हैं की मन्त्र तो नहीं आता बिच्छू का और हाथ डाल दिया सांप के बिल में ! अब देखते जाओ इलाहाबाद कोर्ट ने रेट माफिया वालों के खिलाफ रिपोर्ट माँगी है, जनता सारी दुर्गा जी के साथ है, हाँ चंद राक्षसी एस पी वाले कुछ शोर जरूर मचाएंगे लेकिन फिर अपनी मौत मारे जाएंगे ! बहु सारी बधाई ! हरेन्द्र (अमेरिका से) जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat

एक प्रभावशाली लेख ! गुनाहगार मुख्य मंत्री और उसके सहयोगियों की काली करतूतों की दास्ताँ, दिल दहलाने वाला लेख ! जिस देश में आँख रहते अंधा कान रहते बहर प्रधान मंत्री हो सोनिया और राहुल सता शिखर पर हों उस देश में ऐसी ही बिपती आती रहेगी ! हिमांचल और उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार और दोनों प्रदेशों में प्रलय का तांडव ! अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए और बिपती में फंसे लोगों की बद दुवा तो लगेगी प्रदेश के मुख्य मंत्री राज्यपाल सता से चिपके मंत्रियों और नौकरशाहों को ! वे किये गए अपने पाप कर्मों की ज्वाला में जलेगें ! साथ में उनके सहयोगी चमचे भी इस इस कुण्ड से बच नहीं पाएंगे ! उत्तराखंड से शंकर भगवान् रूष्ट हो चुके हैं और इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा कांग्रेस मंत्रीमंडल को ! बहुगुणा मुख्यमंत्री को, प्रधान मंत्री , कांग्रेस की अध्यक्ष, गृह मंत्री और राहुल गांधी को ! एक जन जागरण लेख ! हरेन्द्र जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

सुनीता जी आपने बी जे पी के बारे में विस्तार से लिख दिया है और भारतीय जनता पार्टी यु पी को ही अपना गढ़ मानते हुए यहाँ से अपने आज की तारिख के बीजेपी के भावी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार श्री नरेन्द्र मोदी लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे ऐसा पार्टी ने इसलिए एलान किया है की वे नरेन्द्र मोदी को आज का अटल बिहारी बाजपेयी समझते हुए जनता के बीच लाने का प्रस्ताव रखे हैं अब सोचने की बात है किसी नेता को इतना बड़ा कद देने से पहले यह तो विचार करना ही चाहिए की उस नेता में ऐसी कुछ बात भी है जिस नरेन्द्र मोदी को बाजपेयी जी ने २००२ के दंगे के दौरान यह कहा हो की मोदी ने अपना राज धर्म नहीं निभाया उसी मोदी को बाजपेयी के बराबर पेश करना क्या बी जे पी के नेता ही कबूल करेंगे हलाकि अब बाजपेयी जी का नाम बीजेपी वाले कम ही लेते हैं जब अडवाणी जी किनारे कर दिए गए फिर बाजपेयी जी तो कब के राजनीती छोड़ चुके हैं उनसे तो बी जे पी वाले अब सलाह मशविरा भी नहीं करते . खैर नरेन्द्र मोदी ने तीसरी बार गुजरात में जीत हासिल की है उनके खिलाफ कांग्रेस एडी छोटी का जोर लगाकर कुप्रचार किया लेकिन जीत नरेन्द्र मोदी की ही हुयी अतः इसको देखते हुए ही बीजेपी उनको आगे लेकर आई है लेकिन अमित शाह को यु पि चुनाव की कमान देने से पहले प्रदेश के नेताओं को भी विश्वास में लेना चाहिए था अगर ऐसा नहीं किया गया तो बीजेपी की अंदरूनी लडाई ही उनको हार का मुख दिखलाएगी निस्संदेह देश में कांग्रेस के प्रति असंतोष है और यूपी में समजवादी पार्टी के काम काज से भी वहां की जनता खुश नहीं वहां फिर से गुंडा राज स्थापित हो चूका है अतः इसका लाभ भी बीजेपी पार्टी को मिल सकता है लेकिन आज बीजे पी और जदयू दोनों अलग हो गये बिहार में इससे एन डी का एक घटक दल तो इनके हाथ से निकल गया है बी जे पी की सीटों का नुकसान इसके चलते तो नहीं होने वाला पर संख्या बल में तो कमी आएगी न अतः यह बड़ा दुर्भाग्य पूर्ण कहलायेगा दोनों दलों के लिए जदयू के लिए भी और बी जे पी के लिए भी खैर यह सब अभी दूर की बात है अभी लोकसभा चुनाव में एक साल की देरी है आपने एक अछि राजनितिक प्रस्तुति दी है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

आदर्णीय सुनीता जी , वास्तव में प्रत्येक दंगा दुर्भाग्यपूर्ण होता है , परन्तु गुजरात और गोधरा के संदर्भ में  सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण तीस्ता शीतलवाद जैसे तथाकथित सैकुलरवादी और मानवअधिकारवादियों की भूमिका है । वे गुजरात मे एक राष्ट्रवादी दल और उसके प्रखर राष्ट्रवादी नेता की चुनावी सफलता को स्वीकार  नहीं कर सके । उन्हो ने गोधरा उपरान्त गुजरात दंगों को , उस दल और उस नेता को पूर्णरूप से बदनाम करने के एक अवसर के रूप में प्रयोग किया । क्या इससे पहले गुजरात में दंगे नही हुए ,या  देश के किसी अन्य भाग में दंगे नही हुए । परन्तु जिस प्रकार यहां पर बिना किसी जांच सबूत के महज कुछ लोगों के आरोपों के आधार पर एक व्यक्ती को प्रारम्भ से ही इन समस्त दंगों का जिम्मेदार ठहरा दिया गया , ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ  था । यह तथाकथित सेकुलरवादी गत दस वर्षों इस व्यक्ती को बदनाम के एक सूत्रीय अभियान में लगे हुए हैं । परन्तु आज तक सफल नहीं हो पाए हैं । यह अपनी हठधर्मिता से दंगे के जख्मों को कुरेद कर बराबर हरा रखना चाहते हैं , जिससे गुजरात के विकास और उस नेता के सबको जोड कर चलने के प्रयासों को झुठलाया जा सके । परन्तु वे इसमें कभी सफल न हो पाए गें , क्यो कि वे न तो प्रजातंत्र का सम्मान करते है , और न ही न्यायालय  का ।    

के द्वारा: anilkumar anilkumar

के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

jlshing...ji .....सादर नमस्कार , आपके द्वारा ...........आपका विस्तृत और शोध परक आलेख पूरे धैर्य के साथ पढ़ा …. पर मुझे ऐसा लगा कि अंतिम पैराग्राफ में आपने सरेंडर कर दिया. पुन: परम्परा पर आ गयीं .....सर मेरे विचार मैंने ऊपर दिएऔर .. पर यहाँ पर ये जो भी मैंने लिखा है कि .....{दूसरी ओर परंपराओं और नैतिक सामाजिक मान्यताओं के पक्षधरों का मानना है कि अगर विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों के क्षेत्र में समाज अपना दखल देना बंद कर देगा तो हालात बद से बदतर होते जाएंगे. वर्जिनिटी की अवधारणा को समाप्त करने का अर्थ है युवाओं को सेक्स की खुली छूट देते हुए किसी भी प्रकार की नैतिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर देना. अगर हम ऐसा कुछ भी करते हैं तो यह सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह समाप्त कर देगा. कैजुअल सेक्स जैसे संबंध हमारे समाज के लिए कभी भी हितकर नहीं कहे जा सकते, इसीलिए अगर परंपराओं, नैतिकता और मूल्यों को सहेज कर रखना है तो वर्जिनिटी की अवधारणा को भले ही जोर-जबरदस्ती के साथ लेकिन कायम रखना ही होगा. लेकिन ये मुद्दा विचारणीय है कि कैजुअल सेक्स की बढ़ती पहुंच के बावजूद आधुनिक युग में लगभग ७० प्रतिशत पुरुष अपने लिए कुंवारी (वर्जिन) पत्नी की तलाश कर रहे हैं।” वह ऐसी महिला को अपनी जीवनसंगिनी नहीं बनाना चाहते जिसने विवाह से पहले किसी के साथ सेक्स किया हो. भारतीय युवाओं की मानसिकता और उनकी प्राथमिकताओं को मद्देनजर रखते हुए एक ओर जहां वन नाइट स्टैंड और कैजुअल सेक्स का प्रचलन जोरों पर है, वहां “वर्जिन पत्नी” की मांग थोड़ी अटपटी सी लगती है....... {{{दूसरी ओर परंपराओं और नैतिक सामाजिक मान्यताओं के पक्षधरों का मानना है}}}.....सादर नमन ,,,,,,

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

आदरणीय सुनीता जी, सादर अभिवादन! आपका विस्तृत और शोध परक आलेख पूरे धैर्य के साथ पढ़ा .... पर मुझे ऐसा लगा कि अंतिम पैराग्राफ में आपने सरेंडर कर दिया. पुन: परम्परा पर आ गयीं यथा - "कैजुअल सेक्स जैसे संबंध हमारे समाज के लिए कभी भी हितकर नहीं कहे जा सकते, इसीलिए अगर परंपराओं, नैतिकता और मूल्यों को सहेज कर रखना है तो वर्जिनिटी की अवधारणा को भले ही जोर-जबरदस्ती के साथ लेकिन कायम रखना ही होगा." काफी पहले पेशेवर महिलाओं, फिल्म अभिनेत्रियों जिनके बारे में यह मान्यता है कि उन्हें अपने पेशे में बहुत बार समझौते करने पड़ते हैं - उन्होंने भी यही कहा था - शादी से पहले शारीरिक सम्बन्ध !.... न बाबा न! आज परिस्थितियां बदली हैं शादी की उम्र बड़ी है थोड़ी आजादी बढ़ी है आधुनिकता के माहौल में बहुत कुछ बदला है ... अगर नहीं बदला है तो पुरुष की पाशविकता ... आज भी महिलाएं/लड़कियां सामूहिक दुष्कर्म के बाद आत्महत्या करती हैं, उनका कथित प्रेमी अपने मित्रों के साथ मिलकर बलात्कार करता है. अगर इन सबको रोकना है तो अमूल चूल परिवर्तन करने होंगे और कठोर दंड का प्रावधान करना होगा या बलात्कार जैसा शब्द को अर्थहीन जान वर्जिनिटी को भी शब्दकोष से हटाना होगा ... ऐसा मेरा विचार है आप बुद्धिजीवी और प्रगतिशील महिलाएं क्या सोंचती है और महिला प्रतारणा को कैसे न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके उसके लिए सामूहिक प्रयास होना चाहिए न कि स्त्री स्वच्छंदता के नाम पर विकृति को बढ़ावा देना......... साभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सुनीता जी आपने आतंकवाद की अच्छी ब्याख्या की है और यह आतंकवाद कई वर्षों से देश और दुनिया में फल फूल रहा है पर एक देश अमेरिका भी है जिसने अपने देश पर एक आतंकी द्वारा हमला किये जाने के बाद अपनी सुरक्छा ब्यवस्था किस तरह चाक चौबंद कर दिया यह जग जाहिर है उस देश के हुक्मरानों ने ओसामा बिन लादेन को उसके छिपने के ठिकाने में घुस कर मारा और उसे समुद्र में दफ़न कर दिया केवल यही कारन है की वहां कोई दूसरा आतंकी हमला नहीं हुवा पर, अपने देश में क्या होता है ? अजमल कसब जो मुम्बई आतंकी हमले में शामिल था रंगे हाथों पकड़ा गया और उसे अपने देश के कानून ने फांसी की सजा सुनाई पर यहाँ के नेता उसे वर्षों जेल में बिरयानी खिलाते रहे जिस आतंकवादी ने इस देश की संसद पर हमला किया /करवाया उसको भी यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई उसको भी वर्षों पालते रहे और जब बहुत देर बाद फांसी हुयी भी तो डरते रहे की यहाँ का मुस्लिम समाज नाराज होकर कांग्रेस को वोट देना न बंद कर दे जब यहाँ के राजनीतिग्य इस तरह की राजनीती आतंकवाद के मसले पर करेंगे और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता को आतंकवादियों द्वारा मरवाते रहेंगे हमला होने के बाद सुरक्षा ब्यवस्था को मजबूत करने में लगेंगे और जैसा की आपने लिखा है की जब तक देश में छिपे आतंकी समर्थकों का खात्मा नहीं होगा तब तक आतंवाद कैसे रुकेगा? क्यूंकि इसमें संदेह नहीं की कोई भी आतंकी हमला बिना देश के अन्दर के लोगों की मिली भगत के संभव है ही नहीं और यह सच्चाई सरकार में बैठे अधिकारीयों नेताओं सबको मालूम है पर नेताओं की मनसा ही नहीं की आतंकवाद को समूल ख़तम किया जाये और इसका कारन भी यही है की किसी आतंकी हमले में आज तक कोई नेता मारे नहीं गए अगर ऐसा होता तो जरुर ये नेता इस पर पाबंदी लगाने की सोचते अब आम जनता के मरने का क्या गम है इन नेताओं को वैसे भी हमारे देश की आबादी विश्व बहर की पूरी आबादी (चीन को छोड़कर ) ज्यादा ही है शायद इसको ध्यान में रखते हुए ही यह सब हो रहा होगा की कुछ तो आबादी कम हो रही है वरना क्या कारन हो सकता है? यह एक गंभीर प्रश्न है आतंकी हमले की सूचना होने के बाद यहाँ आतंकी हमला करके बाख के निकल जाते हैं यह इस देश की सुरक्षा ब्यवस्था की नाकामी नहीं तो और क्या है और नेता तो अपने आप को अति सुरक्छित रख रहे हैं उनकी सुरक्षा में ही तो इस देश की सुरक्षा एजेंसी और पुलिस लगायी गयी है आम जानत को तो भाग भरोसे जीने के लिए छोड़ा गया है अतः जब तक आतंकवाद पर राजनीती होती रहेगी तब तक आतंकवाद दिन दिन अपना पैर फैलता जायेगा और आम जनता यु ही मारी जाती रहेगी

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

दिमाग में ये प्रश्न बार उठता है कि आखिर एक प्रान्त का मुख्यमंत्री देश में इतना लोकप्रिय कैसे हो गया ? मोदी की छवि इस स्वतंत्र भारत के इतिहास में कहीं भी देखने को नहीं मिलती. और खासकर इन हालातों में जब देश के सभी नेताओं की विश्वसनीयता का ग्राफ गिरा हो, तो लगता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या मोदी ने खेल खेला कि पूरा देश उनकी ओर आशा-भरी निगाहों से देख रहा है. उत्तर-प्रदेश के ७० फ़ीसदी आम आदमी को कहीं न कहीं ये विस्वास हो चला है कि यदि मोदी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो देश की काया पलट जायेगी देश में रामराज्य आ सकता है. आपने ऊपर भी इस विषय में लिखा है और आपके लेखन से ये स्पष्ट सा लग रहा है जैसे मोदी अवश्य ही प्रधानमंत्री बनेंगे ! बिलकुल बनेंगे ! लेकिन आप ऐसा नहीं सोच सकते की मोदी के आ जाने से सब कुछ बदल जाएगा ! हाँ , एक असर जरुर दिख सकता है , बहुतज्यादा बदलाव के लिए भाजपा को या मोदी को १०-१५ साल राज सोम्पना होगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

जीवन पीछे लौट जाना चाहता है, पर हजारों मींलों का फासला वापस तय करने के लिये उतनी हिम्मत जुटा पाना हर एक के बस में नहीं ! आज सुबह से आसमान बादलों से भरा है खिड़की, दरवाजों और परदों पर गीली-गीली हवा थपेड़े मार रही है माहौल में अजीब सा भारीपन तैर रहा है जब भी बादल आकाश को अपनी मुठ्ठियों में कैद कर लेते हैं तभी ना जाने क्यों मेरी आत्मा सुलगने व चटखने लगती है इन मेघ भरे बैंगनीं अंधेरे में दिल दहल जाता है और अक्सर ये सोचता है कि रिश्ते क्या होते हैं, ये क्यों पानी की तरह हाथ से छूट जाते हैं ये रिश्ते क्यों बर्फ की तरह जम जाते हैं, जिन्दगी की शीतलता समाप्त कर देते हैं ये बर्फ से रिश्ते निहारते हैं हमारी ओर, आँखों से एक मौन सवाल करते हैं कि जन्म क्या यूं ही बीतेगा. ये बर्फ जैसे सफेद स्याह चेहरे, हमारे जीवन की डोर से बंधकर , एक अनवरत बंधी सी जिन्दगी जीते हैं. टकटकी लगाये बर्फ रूपी रिश्तों के पिघलने का इन्तजार करते हैं बहुत खूबसूरत लेखन आदरणीय सुनीता जी !

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अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार के पहले मंत्रिमण्डल विस्तार में 12 नए मंत्री शामिल किए गए । इन मंत्रियों में चार को पुलिस रिकार्ड में दागी माना गया है।सीएमओ हत्‍याकांड में फंसे विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह से पिछले दिनों सीएम अखिलेश ने ही मंत्री पद छीना था।मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की चौतरफा किरकिरी हुई थी और बाद में उन्होंने पंडित सिंह से इस्तीफा ले लिया था लेकिन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले पंडित सिंह को आखिरकार एक बार फिर से मंत्री बना दिया गया। सूबे में जब से सपा सरकार आई तब से प्रदेश में क़ानून व्यवस्था खस्ताहाल होती जा रही है| इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब अखिलेश सरकार ने बीते शुक्रवार को जानवरों की तस्करी करने वाले एक दागी शख्स को राज्य मंत्री का पद दे दिया| प्रदेश सरकार ने दो दिन पहले ही समाजवादी पार्टी के नेता के सी पाण्‍डेय को गन्‍ना अनुसंधान परिषद का उपाध्‍यक्ष बनाते हुए राज्‍यमंत्री का दर्जा दिया। अब तो यही लगता है कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने गलत हाथों में प्रदेश कि सत्ता सौंप दी है । विवेक मनचन्दा,लखनऊ

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

प्रेम एक दृष्टिकोण है, प्रेम एक चारित्रिक रुझान है जो किसी मनुष्य के साथ-साथ पूरी दुनिया से हमारे संबंधों को अभिव्यक्त करता है. प्रेम केवल एक लक्ष्य और उसके साथ के संबंधों का नाम नहीं है. यदि एक मनुष्य केवल दूसरे एक मनुष्य से प्रेम करता है और उस दूसरे मनुष्य से जुड़े अन्य सभी व्यक्तियों में उसकी रुचि नहीं है, तो उसका प्रेम, प्रेम न होकर उसके अहं का विस्तार मात्र है. प्रेम, इश्क, चाहत, प्यार, मोहब्बत एक ऐसा अनमोल हसीं तोहफा है जिसकि गहराई आप कभी मांप नहीं सकते. किसी बाल्टी में या दरिया में जितना पानी है तो आप ये नहीं कह सकते कि मेरा प्रेम मेरा इश्क इतना ही भरा हुआ है सच तो ये है कि समुन्दर के जल स्तर को तो मांप सकते हैं पर प्रेम और इश्क को नहीं. एक बार जिससे दिल के, मन के और आत्मा के तार जुड़ कर गठबंधन कर लेते हैं फिर उसे अपने प्रेमी को देखने के लिए आँखों की आवश्यकता नहीं पड़ती. क्योंकि प्रेमी तो पूर्ण रूप से ह्रदय में बस चुका होता है. एक ‘प्रेमी’ या ‘प्रेमिका’ होने का अर्थ है ‘प्रेम’ को पा लेना. तो यह बिलकुल वैसी ही बात है, जैसे कोई व्यक्ति लेख लिखना चाहता है और समझे कि उसे केवल एक प्रेरक-विषय की आवश्यकता है, जिसके मिल जाने पर वह स्वत: ही बढ़िया लेख लिख लेगा…… किस लिए छोड़ा जाता है धर्म ? प्रेम के लिए ना, तो फिर प्रेम उंचा हुआ और ये सत्य भी है प्रेम एक ऐसा विस्वास है कि जो सब धर्मो से ऊँचा ह प्रेम एक ऐसा विषय है आदरणीय सुनीता दोहरे जी जिस पर न जाने कितना लिखा गया , कहा गया किन्तु आज तक शायद ही किसी की समझ में बहुत ज्यादा आया होगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

प्रश्न मात्र कपड़ों का नहीं है प्रश्न केवल आपकी दृष्टिकोण का है. जो नारी को केवल उपभोग और काम तृप्ति की भावना से देखते है. अगर महिलाओं के खुले अंगो को या कम वस्त्रों को देखकर पुरुषों के मन में काम वासना पैदा होती है तो फिर पुरूषों के ऊपर भी ड्रेस कोड लागू होना आवशयक है क्योंकि हो सकता है कि पुरुषों का खुला तन महिलाओं के मन में कामेच्छा पैदा करता हो ? बदले की भावना में तो बहुत कुछ कहा और सुना जा सकता है लेकिन इससे कोई हल नही निकलने वाला क्योंकि मूल समस्या उस दृष्टि और सोच की है. जब हर व्यक्ति स्वयं खुद अपने परिवार के नैतिक मूल्यों का रखवाला बने.............बहुत ही सुन्दर और सत्यता से ओत-प्रोत बात कही हैं आपने ...बहुत सार्थक और स्पष्ट लेखन है आपका ! बहुत सुन्दर और स्पष्टवादिता !.सादर प्रणाम ..

के द्वारा: ashok900 ashok900

भारतीय संस्कृति में लज्जा को नारी का श्रृंगार माना गया है. पश्चिमी सभ्यता की उड़ान में महिलाओं को ये भी याद नहीं रहता कि उनके शरीर की बनावट के अनुसार कौन से कपड़ों में वो सभ्य और शालीन दिख रहीं है. मैं ये नही कहती कि आप पश्चिमी सभ्यता के कपड़े न पहने आप जरुर पहनिए पर अपने शरीर की बनावट के अनुसार पहनिए जो आपको खुद लगे कि आप किसी सार्वजानिक स्थान पर जा रहीं है तो लोग आपके पहनावे को देखकर आप पर फब्तियां न कसें. बलात्कार जैसा घिनौना दुष्कर्म सामंती समाज की विकृति और देन है अगर बलात्कार की वजह वस्त्र अभाव होता तो आदिवासी समाज में बलात्कार होते. दरअसल बलात्कार की वजह वस्त्र अभाव नहीं बल्कि विवेक और संयम का अभाव है. बहुत सार्थक और स्पष्ट लेखन है आपका ! बहुत सुन्दर और स्पष्टवादिता !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat