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अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

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उत्तर प्रदेश के दफ्तरों पर यादव राज......

Posted On: 18 Jun, 2016 में

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sunita dohare (2)

उत्तर प्रदेश के दफ्तरों पर यादव राज……

यादवों और रिश्तेदारों को रिझाने की कोशिश में सपा सरकार ये भूल गई है कि साफ़ सुथरी राजनीति जाति और और धर्म पर नहीं टिकती l उत्तर प्रदेश में जब जब सपा की सरकार बनी है तब तब सपा सरकार ने प्रदेश के प्रशासनिक हल्के में यादवों की भरपूर मात्रा में तैनाती की है l सपा सरकार हमेशा से प्रदेश को चलाने में अपनी सियासी चालों के तहत जाति और धर्म की इबारत याद करवाती रही हैं l यूपी में दफ्तरों पर यादव राज का खुला खेल चल रहा है हर सरकारी दफ्तर पर एक यादव बैठा है जिसके कारण अपराधियो के हौंसले दिन व दिन बुलंद होते जा रहे है l …..

उत्तर प्रदेश में राजनीति काफी गरमाई हुई है और इस बीच विभिन्न दल जोड़ तोड़ में भी लगे हुए हैं l जातिगत वोटों की राजनीति भी उत्तर प्रदेश में अहम मानी जाती है l 2017 के चुनाव को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए समाजवादी पार्टी ने भी सुरक्षित सीटों का गणित अपने पक्ष में करते हुए प्रत्याशी उतारे ताकि कहीं कोई चूक न हो जाए इसलिए सुरक्षित सीटों पर ठोक बजा कर प्रत्याशियों को उतारा गया है l आम जनता का मानना है कि समाजवादी पार्टी अपने तरकश से चाहें जितने भी बाण खींच दे लेकिन, ये नकली बाण मैदान में अब कुछ नहीं कर पायेंगे क्यूंकि, समाजवादी पार्टी को ये नही पता कि यहाँ किसी फिल्म के लिये पात्र नही खोजे जा रहे हैं यहाँ देश के भविष्य का सवाल है तो पात्र भी उसी कद का होंना चाहिये l
सपा की नीति, उसका कार्य और उसकी विचारमीमांसा रहस्यवादी है, शायद वो नहीं जानती कि स्वार्थगत राजनीति में अपना भविष्य तलाशने वाली पार्टियों को कभी न कभी मुंह की खानी ही पडती है। आप देखिये ये दोनों पार्टियाँ बसपा या सपा कितनी पारंगत है ये कितनी मंझी हुई है कि वो तमाम विवाद के बावजूद हमेशा से यही दो पार्टियाँ जीत हासिल करती रहीं है, इसका एकमात्र कारण यह है कि प्रदेश में उसका कोई दूसरा मज़बूत विकल्प नहीं है। एक भारतीय जनता पार्टी है किंतु वो भी अपने स्थान पर अडिग रहने वाली नहीं है। उसकी करवटों से देश भलिभांति परिचित है। लेकिन इन प्रदेशवासियों की किसी को नही पड़ी l लोग कहते हैं बेचारे प्रदेशवासी हैं l लेकिन इन्हें बेचारा कहना गलत होगा क्यूंकि, इन्हें अपने अधिकारों की चिंता ही नही है, इन्हें अपनी ताकत का एहसास ही नही है, इन्हें तो बस रोज अखबार पढना, चैनल देखना और किसी चौपाल पर बैठकर राजनीति की बहस कर लेना, फिर उसी महंगाई के चलते रोज रोज की आपाधापी में ही जीवन गुजार देना भर है l उत्तर प्रदेश में रहने वाली हर जाति हर धर्म की भाषा संस्कृति और परम्पराओं की रक्षा सपा सरकार नहीं करना चाहती है और अगर करना चाहती हैं तो फिर धर्म और जाति को बाँट कर l ये आवाम को किस प्रकार की शिक्षा दे रही हैं क्या यही उनका राष्ट्र धर्म है ? अखिलेश सरकार ने ये जाहिर कर दिया है कि उन्हें सिर्फ यादवों की चिंता है बाकी सब जातियां और धर्म उनकी राजनीति की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं l अब जाति और धर्म की राजनीति करके अखिलेश सिंह क्या जाहिर करना चाहते हैं अगर अब भी जनता को सपा सरकार की खामियां नहीं दिख रहीं तो मैं दिखा देती हूँ l जरा गौर फरमाएं …….

ये है समाजबाद की नयी परिभाषा.

आपको भले ही ये बातें महज कयास लगें लेकिन ये सत्य है l इससे आने वाले समय के राजनीतिक समीकरण का अनुमान लगाया जा सकता है l सपा सरकार के इस फार्मूले की धमक राजनीतिक गलियारों से होती हुई प्रदेश के हर सरकारी दफ्तर में महसूस की जा सकती है l
विदित हो कि बीते दो साल में आयोग से की गई नियुक्तियों में जमकर धांधली हुई और एक ही वर्ग के लोगों को ज्यादातर नौकरी मिली है। यूपीपीसीएस से चुने गए 86 एसडीएम में 54 यादव बनाये गए l सपा सरकार द्वारा सरकारी दफ्तरों में यादवों की तैनाती से जनता त्रस्त हो चुकी है l ये अब उत्तर प्रदेश नही रहा, अब यादव प्रदेश बन गया है वो दिन अब दूर नही जब सपा सरकार उत्तर प्रदेश का नाम बदलकर यादव प्रदेश रख देगी l वो भी क्यूँ जरा, देखिये नीचे की लिस्ट में …….

यूपी 75 जिले के 1526 थाने में करीब 600 यादव थानेदार हैं। राजधानी लखनऊ में 43 पुलिस थाने हैं जिसमें से लगभग 20 थानों पर यादव थानेदार नियुक्त हैं।  कानपुर में 44 पुलिस थाने में है जिसमें लगभग 17 थानों पर यादव थानेदार हैं।  बदायूं के 22 पुलिस थानों में से लगभग 11 थानों पर यादव थानेदार हैं। मथुरा में 21 में से लगभग 10 पुलिस थानों में यादव थानेदार हैं। इटावा के 21 में से लगभग 8 थानों में यादव जाति के थानेदार हैं। संभल जिले के 11 पुलिस स्टेशनों में से लगभग 7 पर यादव जाति के थानेदार हैं। गाजियाबाद के 17 में से लगभग 9 थानों पर यादव जाति के थानेदार तैनात हैं।  फिरोजाबाद के 21 में से लगभग 9 पुलिस स्टेशन पर यादव थानेदार हैं।

देखा जाए तो ये बड़ी ही भयावह स्थिति है सपा सरकार में पुलिस का यादवीकरण कर दिए जाने से ये थानेदार किसी की नहीं सुनते, ये जनता के प्रति कठोर रवैया अपनाते हैं l अगर कोई उच्च अधिकारी रैंक का अफसर इन पर सख्ती करता है तो ये ऊपर के लोगों से बात कराते हैं। ऐसे में फिर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्‍थिति कैसे सुधरेगी। यहाँ के हर थानों में यादव अफसरों का वर्चस्व गरीबों को इन्साफ नहीं बल्कि उनके धन को लूटता है l
75 जिलाध्यक्षो में 63 यादव (समाजवादी पार्टी) , 75 BSA में 62 यादव,  67% थानाध्यक्ष यादव,    जो यादव BDO है उनको 3 से 4 ब्लाक दिए गए हैं, भर्ती परीक्षाओं में यादव 69%, सड़क पानी बिजली का केवल शिलापट्ट पर नाम व कमीशन,  UPSC के अध्यक्ष अनिल यादव, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का अध्यक्ष रामवीर यादव, अधीनस्थ सेवा आयोग के अध्यक्ष राज किशोर यादव, माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड के अध्यक्ष रामपाल यादव।
समाजवादी पार्टी का पूरा परिवार सांसद से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक है शायद इसी परिवार के पास दिमाग का भंडार है और किसी के पास नहीं, उत्तर प्रदेश में बड़े बड़े बुद्धिजीवी है लेकिन उनको दरकिनार कर ये पार्टी सिर्फ यादवों को भर्ती कर आम जनता को समाजवाद का पाठ पढ़ा रही है l  देखिये नीचे इस लिस्ट को…..
मुलायम सिंह यादव – सांसद, अखिलेश यादव (पुत्र) – मुख्य्मंत्री,  रामगोपाल यादव (भाई) – सांसद
डिम्पल यादव (पुत्र बधु ) – सांसद, धर्मेंद्र यादव (भतीजे ) – सांसद, अक्षय यादव (भतीजे ) – सांसद
तेजप्रताप यादव (पोते) – सांसद,  शिवपाल सिंह यादव (भाई) – विधायक(मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार)
अंशुल यादव(भतीजे) – जिलापंचायत अध्यक्ष इटावा, शंध्या यादव (भतीजी) – जिलापंचायत अध्यक्ष मैनपुरी, मृदुला यादव (भतीजे की पत्नी)- ब्लॉक प्रमुख सैफई, अजंट सिंह यादव (बहनोई) – ब्लॉक प्रमुख, प्रेमलता यादव (भाई की पत्नी) – जिलापंचायत सदस्य, सरला यादव (भाई की पत्नी) – निदेशक जिला सहकारी बेंक इटावा, आदित्य यादव (भतीजे) – PCF के चेयरमैन, अनुराग यादव (भतीजे ) – राष्ट्रीय सचिव समाजबादी युवजन सभा, अरबिंद यादव (भांजे ) – एमएलसी, बिल्लू यादव (भांजे ) – ब्लॉक प्रमुख करहल, मिनाक्षी यादव (भांजे की पत्नी – जिलापंचायत सदस्य मैनपुरी, बंदना यादव (रिस्तेदार) – जिलापंचायत अध्यक्ष हमीरपुर और अब पुत्रबधू अर्पणा यादव प्रत्यासी विधानसभा क्षेत्र लखनऊ केंट.
लोगों का मानना है कि यादवों और रिश्तेदारों को रिझाने की कोशिश में सपा सरकार ये भूल गई है कि साफ़ सुथरी राजनीति जाति और और धर्म पर नहीं टिकती l उत्तर प्रदेश में जब जब सपा की सरकार बनी है तब तब सपा सरकार ने प्रदेश के प्रशासनिक हल्के में यादवों की भरपूर मात्रा में तैनाती की है l  अगर इन मामलों को लेकर केंद्र सरकार चुप्पी साधे बैठी रही, तो आने वाले दिनों में सूबे में ईमानदार अफसरों का अकाल पड़ जाएगा।
सपा सरकार हमेशा से प्रदेश को चलाने में अपनी सियासी चालों के तहत जाति और धर्म की इबारत याद करवाती रही हैं l उत्तर प्रदेश की जनता जो अलग अलग जाति और धर्म से जुडी है और जिसने आपको अपना कीमती वक्त और वोट देकर जिस मुकाम पर पहुंचाया है l क्या आप उस अवाम को एक निगाह से देख रहे हैं ? आपकी राजनीति की चालों को न समझकर भले ही ये भोली भाली जनता आपकी आगे आने वाली रैलियों में आपका मनोबल बढ़ा दे लेकिन, जहाँ तक मैं समझती हूँ कि इस तरह की राजनीति को देखते हुए आप आगामी चुनावों में उत्तर प्रदेश की कुर्सी पर कभी काबिज नहीं हो पायेंगे l समय रहते चेत जाना एक अच्छे शासक की निशानी होती है l अंत में एक सलाह और देना चाहूंगी कि यूपी में दफ्तरों पर यादव राज के कारण अपराधियो के हौंसले दिन व दिन बुलंद होते जा रहे है उनका निराकरण कीजिये l सपा को ये समझना होगा कि राजनीति से ऊपर राष्ट्र नीति होती है हर चीज को राजनीति से नहीं तौला जाना चाहिए सबका साथ, सबका विकास और सबको जोड़कर चलने से जो विकास होता है, वो प्रदेश की सरकार को दिखाना चाहिए l
सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक
इण्डियन हेल्पलाइन न्यूज़

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