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अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

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उन तीन घंटों की दहशत जो मैंने झेली, हर पल काँपता रहा ह्रदय (एक सत्य घटना)

Posted On: 22 Oct, 2014 Others में

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sunita dohaare


गोमती ट्रेन में आज के कुछ माह पहले एक ऐसा वाकया घटा था मेरी आँखों के सामने जिसे मैं आज तक नहीं भूल पा रही हूँ और अक्सर ये सोचती रहती हूँ कि जनता बलात्कार होने के बाद मोमबत्तियां जलाकर, नारे बाजी करके सरकार को कोसती रहती है लेकिन जब उनकी आँखों के सामने ऐसे हादसे होते है या होने वाली स्थिति में होते हो तो पब्लिक अपनी आँखें बंद करके निकल लेती है और यही सोचती है होने दो मेरा क्या जाता है!…..
वाकया यूँ था कि मैं “गोमती एक्सप्रेस” से दिल्ली जा रही थी यूँ तो मैं अक्सर दिल्ली जाती रहती हूँ पर “शताब्दी एक्सप्रेस” से जाती थी उस दिन मुझे शताब्दी का टिकिट न मिला और मेरा जाना बहुत जरूरी था इसलिए मैं गोमती से ही चल दी, अलीगढ़ तक तो कोई परेशानी नहीं हुई लेकिन अलीगढ़ मैं जैसे ही ट्रेन रुकी ढेर सारे लोग सेकेण्ड एसी में आ गये यही कोई अमूमन ३० से ३५ लोग रहे होंगे ! टीटी अचानक ना जाने कहाँ गायब हो गया और उन व्यक्तियों ने घुसते ही हो हल्ला शुरू कर दिया कुछ महिलायें पहले से खड़ीं थीं जिनको टीटी ने खुद ही अन्दर रुकने को कह दिया था क्योंकि लखनऊ से वे ट्रेन में चढ़ चुकीं थीं और टीटी ने आश्वासन भी दिया था कि सीट खाली होने पर आपको सीट हम दे देंगे तब तक अन्दर खड़ी हो जाइये आप लोग ! मेरी आदत है कि जब भी मैं सफ़र करती हूँ तो उस समय में गानों को सुनती रहती हूँ और इसी आदतनवश मैं इयर फोन लगाकर आँखें बंद करके गाने सुनने में मशगूल थी कि अचानक मेरे फोन पर काल आई जिसे उठाने के लिए मैंने आँखें खोली तो देखती क्या हूँ कि उन महिलाओं के साथ वे व्यक्ति अभद्रता कर रहे हैं और बेचारी डर के कारण कुछ बोल नहीं पा रही हैं मैं फोन उठाना तो भूल गई मारे घबराहट के ! उनमें से कुछ दबंग टाइप के व्यक्ति मुंह में पान भरकर गलियां बक रहे हैं, कुछ गंदे कमेन्ट मार रहे हैं और कुछ उन महिलाओं के अंगों को अपने हांथों की कुहनियों से छू रहे हैं, उन बद्द्त्मीज ब्यक्तियों में से एक बोला यार बहुत गर्मी है और इस तरह के चौकस माल को देख कर रहा नही जा रहा है ! अब तक तो मैं सुन रही थी लेकिन मुझसे बर्दाश्त ना हुआ, मैंने मौके की नजाकत को देखते हुए बड़ी ही नम्रता से कहा भैया जी थोडा शोर कम करिए और डिब्बे के गेट को बंद कर लीजिये क्योंकि एसी इसीलिए काम नहीं कर रहा है मैंने इस बात को सिर्फ उनका ध्यान बटाने के लिए कहा था ताकि उन्हें लगे कि कोई उनका विरोध भी कर सकता है लेकिन उनमें से एक बोला इन मैडम को गर्मी ज्यादा लग रही है इन्हें डिब्बे के बाहर फैक दो, ऐसी स्थिति को देखकर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ इसलिए मैंने कहा ओके भैया जी आपको जो ठीक लगे आप वो ही करिए ऐसा कहकर  मैं अनजान बनकर इन कमीनों को सबक सिखाने की सोचने लगी !
उनमें से एक व्यक्ति ने मुझे एक बार देखा और बोला यार इन मैडम को कहीं देखा है अपना सर खुजाते हुए बोला याद नहीं आ रहा लेकिन कोई नामी हस्ती है इनसे पंगा मत ले बे, इन शब्दों को कहने वाला आगे की ओर खिसक गया लेकिन बाकी
उन महिलाओं के साथ बराबर छेडछाड करते करते मेरी ओर देखते जाते, उन लोगों के इस तरह देखने की बजह से में फोन से किसी की मदद भी नहीं ले सकती थी इतने में इसी बीच उन दबंगों के द्वारा महिलाओं से छेड़छाड़ को रोकने के एवज में एक पीसीएस अधिकारी से ये सब देखा न गया उन्होंने इसका विरोध किया तो बदले में जो शब्द सुनने को मिले वो यूँ थे कि… ओय तेरा नाम क्या तू बहुत उछल रहा है, उनके साथ एक उनका सहायक था वो बोला साहेब से बद्द्त्मीजी मत करो, दबंगों ने कहा – कौन है बे ये ? चल उठ साले नाम बता अपना ! वो चुप चाप सब सुनते रहे कुछ ना बोले उनके सहायक ने कहा ( काल्पनिक नाम) विकास गौतम ! अच्छा दलित है साला, तभी गर्मी चढ़ी है साले को, चल उठ सीट खाली कर, पीछे से आवाज आई ये दलित होकर मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गया इसकी इतनी हिम्मत, साला “एससी” वर्ग का है आरक्षण से आ गया, उच्च पद पर बैठा है इसलिए साले की सुननी पड़ी, अगर यही होता हमारे क्षेत्र में तो गिरा के मारते साले को, एक दूसरी आवाज आई, अबे यहाँ क्यों नहीं मार सकता ? मार साले को, किसी ने बीच बिचाव करके उन लोगों को शांत करवा दिया लेकिन ये शब्द मेरे कानों में एक पिघले शीशे की तरह उड़लते चले गये, दिमाग सुन्न हो गया मेरा, एक पल को कुछ समझ ना आया, इतने बड़े डिब्बे में जनता भरी पड़ी थी लेकिन उन महिलाओं की कोई मदद नहीं कर रहा था साथ ही उन महाशय की भी जिन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी ! उन तीनों महिलाओं के साथ एक लड़की भी थी जो बुरी तरह से परेशान थी!
वो कभी कभी मेरी ओर कातर निगाहों से देखती जाती जैसे कह रही हो मुझे बचाओ
मैंने आँखों से इशारों ही इशारों में उसे आश्वासन दे दिया था लेकिन दिमाग ये जरुर समझ रहा था कि समय कम है अगर जल्दी ही मदद नहीं मिली तो कुछ भी हो सकता है ! मेरे फोन में डायलिंग में नम्बर पड़ा था एसपी सिटी बरेली राजीव मल्होत्रा जी का, कल ही उनसे मेरी बात हुई थी !


एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा

इसी शोरशराबे मैं मौका देखकर मैंने जल्दी से फोन को पर्स के अन्दर रखे रखे ही छुपाकर उस नम्बर को मिला दिया था एसपी सिटी बरेली राजीव मल्होत्रा जी, जो कि मेरे अभिन्न मित्रों में से एक हैं और मेरी हर आने वाली परेशानी को बखूबी निपटा देते हैं ! मेरी ही परेशानी क्या वो हर उस व्यक्ति की मदद करते हैं जो कष्ट में होता है ….
फोन के लगते ही मैंने फोन पर कहा राजीव मैं बहुत मुसीबत में हूँ, वो घबरा कर बोले क्या हुआ, तुम हो कहाँ ? मैंने कहा मैं गोमती से दिल्ली जा रही हूँ और रास्ते में अलीगढ से कुछ गंदे लोग चढ़ गये हैं जो कुछ महिलाओं के साथ अभद्रता कर रहे हैं जल्दी से कुछ करो ! उन्होंने कहा कि तुम कुछ बोलोगी नहीं मैं तुरंत कुछ करता हूँ ….. राजीव ने तुरंत अलीगढ से आगे आने वाले स्टेशन पर खबर की और लगातार फोन पर रहकर मेरी और उन महिलाओं की रक्षा की, अगला स्टेशन आते ही पुलिस फ़ोर्स ने उन व्यक्तियों में से करीब ५ लोगों को गिरफ्तार कर लिया बाकी सब स्टेशन आने के पहले अन्दर ही अन्दर डिब्बे को बदल लिए और रुकते ही भाग गए ! मैंने पुलिस फ़ोर्स को धन्यवाद कहा लेकिन उनमें से एक सिपाही अचानक बोला मैडम आपको इस ट्रेन से नहीं आना चाहिए थामेरा पारा तो पहले ही चढ़ा हुआ था उसकी ये बात सुनकर मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर हो गया, मुझे पता नही कहाँ से इतनी गुस्सा आ गई मैंने आव ना देखा ताव लगी सुनाने……मैंने उससे कहा कि.. मिस्टर अगर तुम ऑन ड्यूटी नहीं होते तो तुम्हारे एक जोर का थप्पड़ रसीद कर देती, तुम्हारी हराम की खाकर पड़े रहने के चैन में खलल पड़ गया इसीलिए इतनी निठल्ली बातें कर रहे हो शर्म नहीं आती तुमको, अभी तुम्हारे डीआईजीसे बात करती हूँ गुस्से में कुछ नहीं सुझ रहा था मैं बोले जा रही थी हराम की खाकर पड़े रहने की आदत पड़ गई है तुम जैसे लोगों की, नालायक कहीं के… उनका अफसर साथ में था बोला मेम जाने दीजिये, सस्पेंड हो जायेगा, बेचारा भूखों मर जायेगा” …. मुझे देखकर बड़ा अजीब लग रहा था खैर ट्रेन चल पड़ी पुलिस फ़ोर्स भी ट्रेन के साथ दिल्ली तक इसी डिब्बे में गई.. मेरा मन नहीं कर रहा था कि दिल्ली जाऊं लेकिन उस मीटिंग को अटैंड करना अत्यंत आवश्यक था सो जाना पड़ा ! मैं एकदम शांत होकर बैठ गई और पूरे समय यही सोचती रही कि अगर आज राजीव ना होते तो शायद वो महिलाएं आज सुरक्षित ना होतीं और साथ ही मैं भी इस सत्य घटना को आपके साथ बाँटने के लिए जिन्दा ना होती ! सो राजीव बहुत बहुत धन्यवाद आपका, आपकी दोस्ती पर नाज है मुझे !
अगर हमारे देश में ऐसे जुझारू और तुरंत कार्यवाही करने वाले पुलिस अफसर होंगे जैसे कि राजीव मल्होत्रा जी है जो आजकल बरेली मैं एसपी सिटी हैं तो हमारे देश में बलात्कार जैसी घटनाएं रुकने के साथ ही कम हो जाएँगी ! लानत है उस डिब्बे में बैठे उन तमाम यात्रियों पर और उन सहयात्रियों पर जो अपने साथ सफ़र कर रहे यात्रियों की मदद नहीं कर सकते और सरकार, पुलिस को कोसते रहते हैं………
सुनीता दोहरे …

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
November 13, 2014

यदि इस देश का प्रत्येक वर्दी धारी राजीव मल्होत्रा और प्रत्येक माँ आप जैसी हो ,तो शायद पूरा देश ही स्वर्ग बन जाये |सादर आभार आदरणीया .

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    November 13, 2014

    pkdubey, जी ….. बहुत -बहुत धन्यवाद आपका ! सादर प्रणाम …

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
October 30, 2014

सुनीता जी अभिनन्दन आप को और आपके तात्कालिक सहयोगियों को | यदि आप जैसे प्रभाव शाली लोग तत्कालिग एक्शन लेते रहें तो कुद्रष्टियां खुल ही नहीं पाएंगी | सब कुछ फिल्मी अंदाज मैं हो गया । ओम शांति शांति स्वतः ही स्थापित होती जायेगी 

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    October 31, 2014

    PAPI HARISHCHANDRA जी, सर ये सत्य है कि फिल्मों में कुछ हद तक सीन रियल लाइफ में गुजरी घटनाओं से ही सम्बंधित होते हैं …लेकिन जिसके सामने और जिसके साथ इस तरह की घटनाएं अगर होती हैं तो कई दिनों तक तो वो सकते मैं रहता है मैं खुद भी भय वश कई महीनों तक दिल्ली नहीं गई , दिमाग में अब भी एक खौफ सा छाया रहता है, मुझे अभी भी ट्रेन की आवाज से डर सा लगता है … लेकिन जिन्दगी जीना है तो इसके खिलाफ लड़ना ही पड़ेगा, मुझे काफी वक्त लग गया इस घटना से उबरने में ….. आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!!! सादर प्रणाम …

vipinsharma के द्वारा
October 25, 2014

आदरणीय सुनीता जी ,  बद्तमीज लोंगो और अपराधियों की शरणस्थली बन चुकी भारतीय ट्रेनों से यात्रा करना अब बेहद खतरनाक हो चूका है , सलाम है आपके जज्बे को और एस पी सिटी बरेली के राजीव मल्होत्रा जी को मेरा सादर नमन है अगर जनता इसी तरह अपना कर्तव्य पालन करती रहें और पब्लिक थोड़ी भी जागरूक और सहयोगी हो तो इन गुंडे मवालियों का होश ठिकाने पर आ जायेगा … सादर नमन है आपकी लेखनी को ..

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    January 6, 2015

    जी , आपका मेरी पोष्ट पर आना ही मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है , आपका बहुत – बहुत धन्यवाद ! सादर प्रणाम

jlsingh के द्वारा
October 23, 2014

आदरणीया सुनीता जी, सादर अभिवादन! आप जैसी और श्री राजीव मल्होत्रा जैसे लोग अगर अपना कर्तव्य पालन करते रहें और पब्लिक थोड़ी भी जागरूक और सहयोगी हो तो इन गुंडे मवालियों का होश ठिकाने पर आ जायेगा …पर ये पब्लिक तो …बस! और के कहाँ आपने सब कुछ कह दिया है..सादर!

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    October 24, 2014

    jlsingh जी , आपका मेरी पोष्ट पर आना ही मेरे लिए बहुत है, आपका बहुत – बहुत धन्यवाद ! सादर प्रणाम …

sadguruji के द्वारा
October 23, 2014

आदरणीया सुनीता दोहरे जी ! बेहद शर्मनाक घटना ! सबसे पहले आपके.पीसीएस अधिकारी के और एसपी सिटी बरेली राजीव मल्होत्रा जी के बदमाशों से जूझने के हौसले को सलाम ! महिलाओं से अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ करनेवाले ऐसे संस्कारहीन लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए ! मोदी साहब का झाड़ू ऐसे अपराधियों पर न जाने कब चलेगा ! ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था भी बहुत ख़राब है ! मैंने कई साल से ट्रेनों से यात्रा करना ही छोड़ दिया है,क्योंकि कई साल पहले मैं लखनऊ से कानपूर जा रहा था.मेरे पास बैठ एक बद्तमीज सिगरेट पर सिगरेट फूंके जा रहा था.मेरे शिष्यों ने उसे कई बार समझाया,पर वो माना नहीं,बल्कि उलटे झगड़ा करने लगा.टीटी और पुलिसवाले भी उसे सिगरेट फूंकने से नहीं रोक पाये ! मैंने बद्तमीज लोंगो और अपराधियों की शरणस्थली बन चुकी भारतीय ट्रेनों से यात्रा करना ही छोड़ दिया ! आपने सही कहा है कि लानत है उस डिब्बे में बैठे उन तमाम यात्रियों पर और उन सहयात्रियों पर जो अपने साथ सफ़र कर रहे यात्रियों की मदद नहीं कर सकते और सिर्फ सरकार व पुलिस को कोसते रहते हैं ! एक शर्मनाक,परन्तु तुरंत कड़ी कार्यवाही किये जाने हेतु अत्यंत विचारणीय घटना शेयर करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार ! आपको दिवाली की शुभकामनाएं !

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    October 23, 2014

    sadguruji जी, आपका मेरी पोष्ट पर आना ही मेरे लिए बहुत है आपका बहुत – बहुत धन्यवाद ! सादर प्रणाम !!!!!


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