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अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

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भ्रूण रूप में आई कन्या, जब शाप इन्हें दे जायेगी....

Posted On: 6 Jul, 2014 Others में

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sunita doharepic
भ्रूण रूप में आई कन्या, जब शाप इन्हें दे जायेगी

जलती अबला, लुटती अस्मत जब ही बच पायेगी,
जब धरती के यमराजों की, चिता यहीं जल जायेगी
रुक जाओ पापियों, कन्याधन की राशि यहीं मिट जायेगी
तब धरती के यमराजों की, यहीं शान धरी रह जायेगी
रोती सृष्टि फिर बिना नारि के, सहज नहीं बच पायेगी
ये देख, सम्बन्धों में सरस ग्रंथि की बूंद सूख रह जायेगी
अम्बर की सिला के चूनर, नारी जब ओढ़ के आएगी
तब धरती के यमराजों की, चिता यहीं जल जायेगी
वो ऊपर बैठा ईश्वर रोये, आगे सृष्टि कैसे चल पायेगी
माता, पत्नी, बेटी, बहिना, फिर ये किसे कहां मिल पायेगी
भ्रूण रूप में आई कन्या, जब शाप इन्हें दे जायेगी
तब धरती के यमराजों की, चिता यहीं जल जायेगी
अगर सन्तुलन बिगड़ गया, तो धरती माँ फट जायेगी
हर कुरीति का उन्मूलन कर, वो फिर से सृष्टि सजाएगी
अवनी तल पर देख पाप को, माँ शक्ती नये रूप में आयेगी
तब धरती के यमराजों की, चिता यहीं जल जायेगी………
@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@

ये खुदा जो तू न होता….

जो न होता तू मेरे दिल में, तो न कोई ख्वाब ही पलता
तो फिर कहाँ होती ये मोहब्बतें, न ही कोई हसरतें होतीं
बिना तेरी हुकूमत के यहाँ पे, पेड़ का पत्ता नहीं हिलता
जो सर पे तेरा हाँथ ना होता, तो बड़ी ही उलझनें होतीं
इस जहाँ को हे मेरे ईश्वर ! जो तेरा खौफ न होता
तो संसार में माँ बहिन के रिश्तों की दरकतीं अस्मतें होती
वो दिल में छल कपट, मन में नफरतों का दरिया रखते हैं
जो तू न होता अगर दिल में, तो कहर बरपातीं ताकतें होतीं
हैं सभी पे बड़ी ही रहमतें तेरी, जो धरती माँ की गोद दी तूने
जो तेरी शक्ती न होती, तो आसमां की लगा दी कीमतें होतीं
बस अब है यही तमन्ना, कि रूह की पाकीजगी हो इंशा की
जो तू न होता अगर सबमें, तो कोख प्रेम की बंजर हो गयी होती
सुनीता दोहरे…..
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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
July 17, 2014

अकाट्य सत्य आदरणीया |

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    July 17, 2014

    pkdubey जी ,आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर प्रणाम !!!!

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
July 9, 2014

सुनीता जी अभिवादन ,सत्य यह भी है जो आपके दर्द मैं है सत्य यह भी है समय ख़राब है सत्य यह भी है असुरक्षित है नारी सत्य यह भी है नारी अनेक रूपों मैं प्रताड़ित करती है तो होती भी है त्रिया चरित्र भी उसी के रूप हैं प्रकृति मैं जो कुछ भी होता है उसकी प्रतिक्रिया अवश्य होती है चालाक कुसल ,सशक्त लोग सब कुछ सहजता से निभा लेते हैं भावुक तडपते है दर्द  देने वाले को दर्द अवश्य प्रतिक्रिया मैं मिलता है ओम शांति शांति जप कर ही शांति का आभास करो 

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    July 11, 2014

    PAPI HARISHCHANDRA जी, मेरी पोस्ट पर आने के लिए शुक्रिया …. सादर प्रणाम !!!!

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    July 11, 2014

    vandana singh जी , लिंक देने के लिए सुक्रिया ….सादर नमन

sadguruji के द्वारा
July 7, 2014

अगर सन्तुलन बिगड़ गया, तो धरती माँ फट जायेगी हर कुरीति का उन्मूलन कर, वो फिर से सृष्टि सजाएगी और हैं सभी पे बड़ी ही रहमतें तेरी, जो धरती माँ की गोद दी तूने जो तेरी शक्ती न होती, तो आसमां की लगा दी कीमतें होतीं ! लाजबाब और बहुत भावपूर्ण रचनाएँ ! ह्रदय को छूती हुईं ! बहुत बहुत बधाई !

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    July 7, 2014

    sadguruji जी , आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर नमस्कार

abhishek shukla के द्वारा
July 6, 2014

आदरणीय मैम! वर्तमान परिवेश का बहुत सटीक वर्णन किया है अपने. एक तरफ सवाल उठाया है तो दुसरे तरफ जवाब भी. समाज में यमराज की घोर कमी पड़ गयी है, पापियों की संख्या अधिक है अपेक्षाकृत यमराज के…असंतुलन का होना स्वाभाविक है…बहुत सुन्दर रचना….बधाई……

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    July 6, 2014

    abhishek shukla जी , आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर नमस्कार

anilkumar के द्वारा
July 6, 2014

आदरणीय सुनीता जी , बहुत सटीक चेतावनी कि ,  अगर सन्तुलन बिगड़ गया, तो धरती माँ फट जायेगी हर कुरीति का उन्मूलन कर, वो फिर से सृष्टि सजाएगी और ईश्वर के आस्तित्व का सार्थक बोध कराती कविता , - ये खुदा जो तू न होता - । बहुत सुन्दर बधाई ।

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    July 6, 2014

    anilkumar जी , तारीफ करने के लिए आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर नमस्कार


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