sach ka aaina

अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

220 Posts

936 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12009 postid : 730993

आज अपने साए से लिपट के कोई रोया होगा...

Posted On: 12 Apr, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सुनीता दोहरे प्रबंध सम्पादक

आज अपने साए से लिपट के कोई रोया होगा…..

फिर कसक उठी सीने में, वहमों गुमां लिए हुए !
लगता है कि आज फिर कोई जी भरके रोया होगा !!

मुद्दतें हो गई उन्हें खुद को मेरी आँखों में सँवारे हुए !
लगता है बाद मुद्दत के दागों को उसने धोया होगा !!

एक अजब सनसनाहट है इन बहकती हुई सी हवाओं में !
लगता है तड़फ के दुआओं में उसने मुझको माँगा होगा !!

हुई आँख नम कि आसुओं के गम, दम तोड़ चुके !
कि आज खुद के साए से लिपट के कोई रोया होगा !!

मेरे इश्क का चैन लूटके बेरंग शमां सिहर गया !
कि आज शाम उल्फत के बसेरे में कोई तरसा होगा !!

याद आते-जाते भी अब आने का नाम न लेती !
कि आज उसकी हिचकियों ने भी दम तोड़ा होगा !!

ये दीवानगी है मेरी, ये ख्वाब है मेरा या हकीकत है कोई !
कि आज मेरी धड़कन से अलग जाके वो फिर तनहा होगा !!


मैं घड़ी भर के लिए, ये मान भी लूँ कि तू अब भी मेरा है !
पर यकीं कैसे करूँ, कि तूने गैर के लिए दामन बिछाया न होगा !!….

सुनीता दोहरे …….

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

juranlistkumar के द्वारा
June 25, 2014

वाह वाह वाह क्या खूब लिखा है ह्रदय की उद्गार को व्यक्त करने के लिए कविता से सुन्दर कोई माध्यम नहीं है, कविता की पंक्तियों में सुन्दर भाव सम्प्रेषण दिख रहा है. कभी हमारे ब्लॉग पर भी पधारें..

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    June 28, 2014

    juranlistkumar जी , जी तारीफ करने के लिए आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर नमस्कार

Shivendra Mohan Singh के द्वारा
April 19, 2014

ह्रदय की उद्गार को व्यक्त करने के लिए कविता से सुन्दर कोई माध्यम नहीं है, कविता की पंक्तियों में सुन्दर भाव सम्प्रेषण दिख रहा है. कभी हमारे ब्लॉग पर भी पधारें http://rjanki.jagranjunction.com

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    April 19, 2014

    shivendra mohan singh जी ,आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर प्रणाम …

ranjanagupta के द्वारा
April 18, 2014

मन को भिगोती रचना !!यादो के दाग लिए ,एक तरह की कसक जगाती पंक्तियाँ! सादर बधाई सुनीता जी !!

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    April 18, 2014

    ranjanagupta जी ,आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर प्रणाम …

sadguruji के द्वारा
April 18, 2014

आदरणीया..बहुत अच्छी लगी ये रचना.ये पंक्तियाँ दिल को छूं गईं- ये दीवानगी है मेरी, ये ख्वाब है मेरा या हकीकत है कोई ! कि आज मेरी धड़कन से अलग जाके वो फिर तनहा होगा !!

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    April 18, 2014

    sadguruji …आप मेरी द्वारा लिखित हर रचना को पढ़ते है और साथ ही अपनी राय देकर मेरा प्रोत्साहन भी बढाते है आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर प्रणाम …

sanjay kumar garg के द्वारा
April 12, 2014

“आज अपने साए से लिपट के कोई रोया होगा” सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया सुनीता जी!

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    April 12, 2014

    sanjay kumar garg जी, आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर प्रणाम …

deepak pande के द्वारा
April 12, 2014

मैं घड़ी भर के लिए, ये मान भी लूँ कि तू अब भी मेरा है ! पर यकीं कैसे करूँ, कि तूने गैर के लिए दामन बिछाया न होगा ! वाह सुनीता jee अंतिम पंक्तियाँ बहुत गहराई लिए हुए हैं बहुत खूब उम्दा रचना

    sunita dohare Management Editor के द्वारा
    April 12, 2014

    deepak pande जी, आपका बहुत -बहुत धन्यवाद सादर प्रणाम …


topic of the week



latest from jagran