sach ka aaina

अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

210 Posts

929 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12009 postid : 622902

मेरी पांच रचनाएं-(क्यों रूह को फ़नां किया) .....

Posted On: 9 Oct, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

3

(क्यों रूह को फ़नां किया ) …..

१-दरिया……

मेरा दर्द आसुओं का दरिया बने !
उसके दिल में ये ख्वाहिश पलती रही !!

जख्म सहेजा बहुत, दिल को रोका बहुत !
अश्कों की बारिश हो आँचल पे गिरती रही !!

कोई, कहीं बेवफाई न हमसे हो जाए कभी !
इस डर से अपनी नजरों को झुकाए रही !!

शाम-ए-गम चन्द हसरतों का दरिया बना !
डूबे मंजर में जैसे सीली लकड़ी सुलगती रही !!

था समुन्दर सा विशाल तेरा आशियाँ !
बीच मंझधार क्यों नाव झुकने लगी !!

वो मेरे हैं सदा अब मेरे ही रहेंगे !
ये झूठी ख्वाहिश दिल में पनपती रही !!

अपनी नजरों मैं उसको खुदा मान बैठी !
बस यही गुनाह करके नजरें झुकतीं रहीं !!

रांझे तेरी नजरों में कैसे गिरी ये सुनी !
बस यही एक बात मन को खटकती रही !!

इस हंसी धुंधलके में तू हमसफ़र मेरा होता !
बस यही एक तमन्ना दिल में मचलती रही !!
सुनीता दोहरे …..

————————————————————————-

२-तेरे ख्यालात….

कभी वो दूर कभी पास होके रोते हैं !
उनकी मोहब्बत के बहाने अजीब होते हैं !!

फिर भी गुजार दी है जिन्दगी उनकी खातिर !
उनके घर में मुझ जैसे किरदार क़त्ल होते हैं !!

पाक दामन मैं उनके दरो-दीवार की नींव बनीं !
जहाँ उनके ख्यालात मुझे रात-दिन भिगोते हैं !!

मेरे लिए उन्हें वक्त कहाँ था कि गुनगुनाएँ मुझे !
उन जैसे ही इश्क-ए-कश्तियाँ मंझधार में डुबोते हैं !!

अब चीरके गम-ए-दरिया को सुकून पाया है !
अब कह भी लो सुनी जैसे लोग अजीब होते हैं !! 
सुनीता दोहरे….

—————–———————–

३-प्रेम का बीज…..

तुम्हारा ख़याल भी तुम जैसा है !!!
एकदम कसैला, बेस्वाद……..
कसैला न कहूँ तो और क्या कहूँ
तुम्हारे दिए रिश्ते के जख्मों ने ही तो
समझाया है इसका फर्क
मैं नहीं जानती क्यों बोया था
मैंने प्रेम का वो बीज
जो अंकुरित हुआ वृक्ष बना
लेकिन जब फला तो
दूसरे की खाने की मेज पर सजा
बड़े जतन से सींचा था मैंने
सोचा था तुम और तुम्हारा बारामासी प्रेम
यूँ ही छलकता रहेगा
बहुत गहरी थीं उसकी जड़ें
हाँ तूफ़ान ही तो कहेंगे उसको
जिसने इतनी आसानी से
हिला दिया उस नींव को
अब तुम ही देख लो
उग आई न एक काँटों भरी झाड़
रिश्तों को रिश्ते चुभने लगे
मैं तुम्हे मज़बूरी लगने लगी
और तुमने खलनायक का लिबास ओढ़ लिया
तुम रिश्तों में और,और,थोड़ा और ढूढते रहे
और मैं तुममें अपने लिए प्रेम ढूढते रही……..
सुनीता दोहरे….

=============================

४-अंतिम सुख…..

सुनो क्या तुम्हें पता है
मेरे दिल ने एक चालाकी की है
छोटी-बड़ी खुशियों को सबमें बाँट दिया
अपने लिए एक भी ख़ुशी न समेटी
दुःख बहुत कीमती था इसलिए लॉकर में
रख संभाल लिया अब गाहे-बगाहे एकांत में
दिल के लॉकर को खोलती हूँ
पर्त दर पर्त रोज खंगालती हूँ
क्यों गलती की जो दुःख को न बांटा
दर्द का गोला उठता है सुलगता है
बारूद बनके चीख रहा है
बम की शक्ल में बदल गया पर फटा नहीं
बस अब उस दिन का इन्तजार है
काश कोई चिंगारी हवा दे दे
और सुलगे, फटे उस लॉकर के चीथड़े हों
बस मुझे इन्तजार है इसी अंतिम सुख का……
सुनीता दोहरे ………

५-पवित्र जल…..

ये दिल ठहरा कांच का
रोज तुम एतिहात से उठाते हो
स्व्क्छ ह्रदय से संवारते हो
और गाहे-बगाहे तुम मुझे अपने अश्कों
के पवित्र जल से नहलाते हो
अपने विशाल ह्रदय की पुकार से
इस कमजोर दिल के लिए दुआएं मागते हो
इस दिल के प्रति मेरी यूँ ही आस्था रखना
कि हे प्रभु इसे टूटने मत देना……
लेकिन तुम ये कहते हुए उन पलों को
भूल जाते हो जिन पलों में तुम कहते हो
कि तुम्हारी तस्वीर मेरे दिल में है
कहीं कोई इसे देख न ले, मेरे करीब न आना
मेरा नाम मत लेना, दुनिया जान जायेगी
फिर सब टूट जायेगा, मैं संभाल न पाउँगा
तुम्हारी वेदना सुनकर कहीं कुछ चटक जाता है
कुछ अनकहे ख्वाब एक झटके में बिखर जाते है,
और कुछ बंद मुठ्ठी से रेत की तरह फिसल जाते हैं……….
सब कब रीत गया  पता ही नहीं चला
ख्वाब टूटते गए और मै
लम्हा-लम्हा बिखरती गयी
पर तेरे ख्वाब देखना ना छोड़ा ……
सुनीता दोहरे…..


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

18 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
October 15, 2013

आदरणीया सुनीता जी,सादर अभिवादन! बहुत अच्छी दर्द भरी रचनाओं के लिए ह्रदय से अभिनन्दन ! बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाई ! सादर!

Santosh Kumar के द्वारा
October 12, 2013

आदरणीया ,..सादर प्रणाम बहुत अच्छी दर्द भरी रचनाओं के लिए ह्रदय से अभिनन्दन !……. सम्मान के लिए बहुत बधाई !…..सादर वन्देमातरम !

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 14, 2013

    Santosh Kumar जी , आपका दिल से आभार ……… सादर नमन ….

udayraj के द्वारा
October 11, 2013

बहुत प्रासांगिक प्रस्‍तुति । बधाई

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 11, 2013

    udayraj जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद …………सादर प्रणाम ..

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 14, 2013

    udayraj जी आपका दिल से आभार ……… सादर नमन ….

ushataneja के द्वारा
October 10, 2013

तेरी जीत औ’ जश्न पर मुबारकां देते हैं, तेरी ही कविताओं को गुनगुना देते हैं| बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बनी हो तुम, इसलिए बलैयाँले के मुँह मीठा करा देते हैं| बधाई हो सुनीता जी! बहुत बढ़िया कवितायें हैं|

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 10, 2013

    ushataneja जी आप मेरे ब्लॉग आई और अपने मधुर शब्दों में मेरी रचनाओं की तारीफ की ..आपका दिल से धन्यवाद …. सादर नमन …

Santlal Karun के द्वारा
October 10, 2013

आदरणीया सुनीता जी, “डूबे मंजर में जैसे सीली लकड़ी सुलगती रही/उनकी मोहब्बत के बहाने अजीब होते हैं !!/तुम्हारा ख़याल भी तुम जैसा है !!! एकदम कसैला, बेस्वाद…/दिल के लॉकर को खोलती हूँ पर्त दर पर्त रोज खंगालती हूँ/तुम रिश्तों में और, और, थोड़ा और ढूढते रहे…”-जैसे कंटकों-से चुभते तीखे विछोह से उत्पन्न भावनात्मक मनोविज्ञान को रेखांकित करती कविताओं के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ तथा ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ के लिए के लिए बधाईयाँ !

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 10, 2013

    Santlal Karun जी आपका दिल से धन्यवाद …. सादर नमन …

vaidya surenderpal के द्वारा
October 10, 2013

बेहद सुन्दर कविताएं… बैस्ट ब्लागर बनने की बहुत बधाई सुनीता दोहरे जी।

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 10, 2013

    vaidya surenderpal जी आपका दिल से धन्यवाद …. सादर नमन …

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
October 10, 2013

अपने जीवन की उलझन को कैसे में सुल्झाऊं,बीच भवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊं ,सुनीता जी आपके उद्गार पढकर यह गीत याद आ गया ,,बधाई

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 10, 2013

    PAPI HARISHCHANDRA जी आपने तो सच में इस सदाबहार गाने कि पंक्तियाँ लिखकर इस गीत की याद दिला दी …..आपका बहुत-बहुत धन्यवाद …… सादर नमन …

yamunapathak के द्वारा
October 10, 2013

एक से बढ़कर एक सुनीता जी बेस्ट ब्लॉगर के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई. साभार

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 10, 2013

    yamunapathak ji आपका बहुत-बहुत धन्यवाद …… सादर नमन …..

sonam saini के द्वारा
October 9, 2013

सभी अच्छी कवितायेँ हैं लेकिन “अंतिम सुख” मुझे ज्यादा अच्छी लगी ……..

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    October 10, 2013

    सोनम सैनी जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद …………सादर प्रणाम ….


topic of the week



latest from jagran