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अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

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'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी का फैसला....

Posted On: 13 Sep, 2013 Others में

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‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का फैसला….

16 दिसंबर 2012 की रात चलती बस में हुए गैंगरेप मामले में आखिरकार वह फैसला आ ही गया जिसका इंतजार पूरे देश को था। दिल्ली के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गैंगरेप के लिए दोषी चारों दरिंदों मुकेश शर्मा, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखते हुए यह फैसला सुनाया. चलती बस में पैरा-मेडिकल स्टूडेंट से हैवानियत की हदें पार करने वाले चारों दरिंदों को फांसी की सजा सुनाते हुए कहा कि यह ऐसा अपराध है, जिसने समाज को हिलाकर रख दिया है.
सच कहूँ मुझे तो कोई ख़ुशी नहीं हुई क्योंकिं नाबालिग होने के कारण एक जघन्य अपराधी का बिना फांसी के रह जाना अच्छा नहीं लग रहा मुझे. इन चारों वहशियों को फांसी की सजा तो हुई लेकिन जो सबसे अहम् अपराधी था उसे नाबालिग दिखाकर सिर्फ तीन वर्ष की सजा दी गयी जबकि सबसे ज्यादा दरिंदगी तो उसने ही दिखाई थी.
यह अपराध और उन्माद बिना सोचे समझे नही था यह पूरी योजना के साथ किया गया था तभी तो लड़की को जान से मारने की कोशिश की गयी और उससे पहले एक और आदमी के सात लूटपाट की गयी थी जब लड़की के दोस्त ने उसे बचाना चाहा तो उसे भी बेरहमी से पीटा गया. यह सारे काम बिना सोचे समझे और केवल क्षणिक आवेग में नही किये जा सकते. जो ऐसा काम कर सकता है वे नाबालिग कैसे हो सकता है एक लड़की चीख रही थी लेकिन एक वहशी के मन में कोई दया नहीं थी लेकिन फिर भी उस लड़के की मानसिक दशा को देख कर उसको सब से कम सजा दी गयी.
देखिये विगत दिनों बस ड्राइवर रामसिंह की तिहाड़ जेल में मौत हो चुकी थी उसने तिहाड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. पवन गुप्ता ने साकेत कोर्ट के सामने अंतिम दलील देते हुए कहा था कि मामले के शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़िता के दोस्त ने उसका नाम पुलिसकर्मियों के कहने पर लिया था वारदात की सुबह नाबालिग आरोपी ने रामसिंह के घर पार्टी दी थी। इस पार्टी में इन दोनों के साथ मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा व पवन गुप्ता शामिल हुए थे. बस ड्राइवर राम सिंह का भाई है मुकेश. वारदात के समय मुकेश ही बस चला रहा था. मुकेश ने बस में मौजूदगी की बात मान ली थी. गैंगरेप के नाबालिग आरोपी ही इस वारदात का सबसे जघन्य अपराधी है. वारदात के समय यह कंडक्टर की सीट पर बैठा था और इसी ने झूठ बोलकर पीड़िता और उसके दोस्त को बस में चढ़ाया था। यही नहीं, इसी ने लड़की से साथ छेड़छाड़ शुरू की थी और गैंग रेप के दौरान लड़की के वजाइना में लोहे की रोड भी इसी ने डाली थी। पिछले हफ्ते जूनेवानइल बोर्ड ने आरोपी को 3 साल की सजा दी थी ये सब देखकर तो यही लगता है कि नाबालिगों को बलात्कार और हत्या करने की खुली छूट मिल गई है असली खेल तो अब शुरू होगा.
भारत का नियम ही ऐसा है कि अब ये हाईकोर्ट में फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे और यह केस 4-5 साल और खिचेगा सब जगह से पस्त होने के बाद अंत में राष्ट्रपति महोदय के यहाँ याचिका देंगे फिर 10-20 साल तक इनकी याचिका पड़ी रहेगी और फिर मामला शांत होने पर इनकी फांसी की सजा मांफ कर दी जायेगी ये है इन अपराधियों का भविष्य……
जबकि होना ये चाहिए कि ऐसे केसस मे अपील का प्रावधान ही नही होना चाहिये. इनको तुरंत फांसी पर लटका देना चाहिये ऐसे राक्षसो पर कोई दया नही करनी चाहिए. अरे पापियों लड़की तो उसी वक्त मर जाती है. जब उससे जबरदस्ती होती है समाज की नजरें जब उसे शक भरी, ताने भरी निगाह से देखती है. तुम जैसे आरोपियों के लिए तो फांसी की सजा भी कम है. दरिंदो तुम लोग तो फिर भी खुशकिस्मत हो की तुमने ये गुनाह भारत जैसे महान देश में किया है कम से कम शान्ति पूर्वक फांसी हो रही है. यही गुनाह अगर साउदी अरब या फिर किसी इस्लामिक देश मे किया होता तो तुम्हारी रूहें भी कांप जाती अगली बार पैदा होने के लिये.
आज इन्साफ जरुर मिला है लेकिन पूरी तरह नहीं. मिलेगा जरुर क्योंकि सच को आंच नहीं. जहाँ तक मैं समझती हूँ कि सच्चाई एक ऐसा दीपक है, जिसे अगर पहाड़ की चोटी पर रख दो तो बेशक रोशनी कम करे, मगर दिखाई बहुत दूर से देता है………
सुनीता दोहरे………


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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

September 16, 2013

झकझोर कर रख दिया है आपकी इस पोस्ट ने किन्तु कानून नहीं बदलता यहाँ सऊदी अरब का कानून लागू नहीं हो सकता जबकि ऐसे मामलों में वही होना चाहिए.

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    September 17, 2013

    शालिनी कौशिक एडवोकेट जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद … सादर प्रणाम …….

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 16, 2013

सुनीता जी बिलकुल सही कहा सांच को आंच नही….. बस कभी कभी अपने देश के जरुरत से ज्यादा लचीले कानून को देखकर दुःख होता हैं, क्योकि ऐसे में तो फैसले तुरंत हो जाने चाहिए… पर ये तो अभी कई वर्षो तक ऐसे ही खिचेगा और एक दिन थककर ऐसा सजा दी जाएगी की नए गुनाह फिर से हो सके….. जबकि पुरे अवाम की यही मर्ज़ी थी की बलात्कार जैसे संगीन जुर्म के लिए कोई एक अलग सजा होनी चाहिए… वो फंसी भी हो सकती है और castration भी हो सकती थी…. लेकिन … ये हिंदुस्तान है यहाँ ऐसे पहले भी चलता था और आज भी …..

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    September 17, 2013

    @Pradeep Kesarwani जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ….. सादर प्रणाम …

    sunita dohare sub editor के द्वारा
    September 17, 2013

    Pradeep Kesarwani जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद … सादर प्रणाम …….


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